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बिहार-नेपाल बॉर्डर पर 100+ ट्रक 2 दिनों से खड़े:तीज-दशहरे से पहले सीतामढ़ी में 90% घटे नेपाली कस्टमर्स, बॉर्डर के कारोबारियों पर तबाही का इंपैक्ट

By देश | दैनिक भास्कर
September 2, 2026 7 Min Read
Comments Off on बिहार-नेपाल बॉर्डर पर 100+ ट्रक 2 दिनों से खड़े:तीज-दशहरे से पहले सीतामढ़ी में 90% घटे नेपाली कस्टमर्स, बॉर्डर के कारोबारियों पर तबाही का इंपैक्ट
“पहले दुकान पर नेपाली ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी। अब मुश्किल से 10% लोग भी शॉप पर नहीं आ रहे हैं। करीब 90% कारोबार ठप है। इस बार करोड़ों का नुकसान होने का डर हमें हर दिन सता रहा है। नेपाल की तबाही का दर्द अब हमारे बाजार और रोजी-रोटी में भी दिख रहा है।" ये बयान बिहार-नेपाल बॉर्डर पर कपड़ा शॉप चलाने वाले विनोद कुमार ठाकुर का है। इनका कहना है, नेपाल में सितंबर-अक्टूबर महीने में तीज और दशहरा (दशईं) सबसे बड़ा फेस्टिवल होता है। अब अगर इसी समय कस्टमर्स हमारे शॉप पर नहीं आएंगे, तो कमाई कहां से होगी। दरअसल, नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने सिर्फ वहां की सड़कें, बस्तियां और टूरिस्ट प्लेस को ही नहीं, बल्कि बिहार से जुड़े कारोबार और टूरिज्म की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही से लेकर सीमावर्ती बाजारों, टूरिस्ट गाड़ियों और सामान से भरे ट्रकों तक पर इसका असर दिखाई दे रहा है। फ्लैश फ्लड के बाद बिहार-नेपाल बॉर्डर पर सबसे ज्यादा झटका किसे लगा है? क्या फेस्टिवल से पहले कारोबारियों को होगा नुकसान? टूरिस्टों की संख्या पर कितना पड़ रहा असर? सीमा पर 2 दिनों से खड़े मालवाहक की स्थिति क्या है? नेपाल में फंसे भारतीय पर्यटकों का क्या है हाल? बिहार के व्यापारियों को कितना हो सकता है नुकसान? इन सारे सवालों का जवाब इस रिपोर्ट में पढ़िए… पहले बॉर्डर से जुड़ी तस्वीरें देखिए… बॉर्डर पर नेपाली कस्टमर्स के नहीं आने से दुकानें सूनी भारत-नेपाल बॉर्डर पर कहीं नेपाली कस्टमर्स के नहीं आने से दुकानें सूनी हैं, तो कहीं नेपाल जाने वाले टूरिस्ट गाड़ियों की संख्या अचानक घट गई है। माल लेकर पहुंचे ट्रक 2 दिनों से बॉर्डर पर भंसार की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने बिहार-नेपाल सीमा के अलग-अलग बॉर्डर पॉइंट जोगबनी, रक्सौल और भिट्ठामोड़-जलेश्वर पर पहुंचकर ग्राउंड हालात जाना। सीमा के दोनों ओर तस्वीरें अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन आपदा का असर कहीं न कहीं कारोबार और लोगों की आवाजाही पर दिख रहा है। जलेश्वर भंसार में जहां सामान्य दिनों में रोजाना 1000 से ज्यादा टूरिस्ट गाड़ियां पहुंचती थी, वहां अब पूरे दिन में गिनती की 4-5 गाड़ियां ही पहुंच रही हैं। ज्यादातर गाड़ियां नजदीकी जनकपुर धाम तक जा रहे हैं, जबकि काठमांडू जैसे दूर के टूरिस्ट प्लेस की ओर जाने वाले पर्यटकों की संख्या बेहद कम है। 2 दिनों से भंसार कटाने के लिए ट्रकें बॉर्डर पर खड़ी पर्यटकों की आवाजाही घटने का सीधा असर सीमा से जुड़े कारोबार पर पड़ा है। भंसार कार्यालय के आसपास दुकानों में कस्टमर्स नहीं हैं। साड़ी के दुकानदार विनोद कुमार ठाकुर ने बताया, पहले फेस्टिवल के समय हजार से ज्यादा लोग एक दिन में मेरे शॉप पर खरीदारी करने आते थे, अब वो 10 से भी कम आ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ सामान लेकर पहुंचे 100 से ज्यादा सामानों से भरा ट्रक भंसार की प्रक्रिया पूरी होने के इंतजार में खड़े हैं। 2 दिनों से वे सभी बिहार-नेपाल बॉर्डर पर खड़े हैं। यानी एक तरफ पर्यटकों की आवाजाही लगभग थम गई है, तो दूसरी तरफ ट्रांस्पोर्टेशन भी प्रभावित हुआ है। करीब 100 से ज्यादा ट्रक खाद्य सामग्री, कोयला, मार्बल और अन्य सामान लेकर भंसार प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और राजस्थान समेत कई राज्यों के ट्रक शामिल हैं। ट्रक ड्राइवर अपनी गाड़ियों के साथ आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। भंसार कार्यालय के परिसर में सामान्य दिनों की तरह गाड़ियों की लंबी कतार की जगह इक्का-दुक्का गाड़ियां दिखाई दे रहीं हैं। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट, किराना, परिवहन और पर्यटन से जुड़े दूसरे कारोबार पर भी पड़ रहा है। 'रोजी-रोटी पर संकट गहराया' किराना और जनरल स्टोर चलाने वाले गिराधर पाण्डेय ने बताया, 'कुछ समय पहले तक मेरी दुकान पर हर दिन 400 से 500 कस्टमर्स पहुंचते थे। अब दिनभर इंतजार के बाद भी मुश्किल से 4 से 5 ग्राहक आते हैं। सीमा पार से आने वाले पर्यटक और ग्राहक ही उनके कारोबार की मुख्य वजह थे। जब लोगों की आवाजाही कम हुई तो बिक्री भी गिर गई। दुकान खोलने के बाद दिनभर ग्राहक का इंतजार करना पड़ रहा है। बिक्री नहीं होने से दुकान का खर्च और परिवार का रोजमर्रा का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट और गहरा सकता है।' भिट्ठामोड़ में नेपाली ग्राहकों की आवाजाही लगभग बंद नेपाल के बाजार में आई मंदी का असर भारत की सीमा से सटे सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ बाजार पर भी पड़ा है। यहां दुकानदारों का कहना है, नेपाल से आने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। कपड़ा दुकानदार रूदल कुमार ठाकुर ने बताया, 'पहले नेपाल से बड़ी संख्या में लोग कपड़े, किराना, घरेलू सामान और दूसरी जरूरत की वस्तुओं की खरीदारी के लिए भिट्ठामोड़ आते थे। इससे सीमा बाजार में अच्छी बिक्री होती थी। पहले अगर 100 लोग खरीदारी के लिए आते थे तो अब उनकी संख्या घटकर महज 1 से 2 रह गई है। कस्टमरों की कमी के कारण दुकानदारों को दुकान खोलकर भी खाली बैठना पड़ रहा है। सीमा कारोबारियों का कहना है कि भारत और नेपाल के सीमावर्ती बाजार एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। नेपाल में संकट आने पर उसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई देना स्वाभाविक है।' टूरिस्ट बसों की बुकिंग भी लगभग बंद रक्सौल से नेपाल जाने वाली टूरिस्ट बसों पर भी आपदा का असर पड़ा है। टूरिस्ट बसों की बुकिंग से जुड़े धर्मेंद्र ठाकुर ने बताया, 'फिलहाल नेपाल जाने वाली बसों की बुकिंग लगभग ठप है। पहले बड़ी संख्या में लोग घूमने, धार्मिक स्थलों के दर्शन और पर्यटन के लिए नेपाल जाते थे, लेकिन मौजूदा हालात में लोग यात्रा करने से बच रहे हैं। इससे टूर ऑपरेटर, बस संचालक और पर्यटन से जुड़े दूसरे कारोबार प्रभावित हुए हैं। नेपाल में स्थिति सामान्य होने के बाद ही पर्यटन कारोबार के दोबारा पटरी पर लौटने की उम्मीद है।' बता दें कि नेपाल में हालात बिगड़ने के बावजूद भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह सख्त है। SSB और पुलिस के जवान सीमा पर आने-जाने वाले लोगों और गाड़ियों की नियमित जांच करते नजर आए। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, आपदा के कारण चेकिंग व्यवस्था में कोई विशेष छूट नहीं दी गई है। सीमा पर निगरानी और जांच लगातार जारी है। नेपाली नागरिक बोले- भारत की मदद के लिए धन्यवाद नेपाल के स्थानीय नागरिक नवल कुमार ने संकट की इस घड़ी में भारत की ओर से मिल रही मदद के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा, 'नेपाल पर जब भी कोई बड़ी आपदा आती है, भारत के लोग मदद के लिए आगे आते हैं। इस बार भी भारतीय लोगों ने जिस तरह सहयोग किया है, वह सराहनीय है। भारत की ओर से मिल रही सहायता सिर्फ मदद नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते और मानवीय संवेदना की मिसाल है। हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी नेपाल की मदद के लिए आगे आने की अपील करते हैं।' नेपाल की त्रासदी के बावजूद हर सीमा बाजार में एक जैसी स्थिति नहीं है। अररिया के जोगबनी बाजार के कारोबारियों का कहना है, फिलहाल यहां व्यापार सामान्य है। दुकानदार मोहम्मद मुजाहिद अंसारी ने बताया, 'नेपाल में बाढ़ आने के बावजूद जोगबनी बाजार में कारोबार पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। दुकानदारी पहले की तरह चल रही है। शुरुआती दो-चार दिनों में लोगों की आवाजाही थोड़ी प्रभावित हुई थी, लेकिन उसके बाद बाजार सामान्य हो गया। फिलहाल कारोबार में किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।' नेपाल में त्रासदी के बीच राजस्थान के जोधपुर से काठमांडू गए करीब 35-36 श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौट आए। जोधपुर निवासी राधेश्याम सोनी ने बताया, वे 22 अगस्त को काठमांडू में आयोजित कथा और सात दिवसीय भजन-कीर्तन में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम पूरा होने के बाद वे जनकपुर होते हुए सीतामढ़ी पहुंचे। उन्होंने बताया, उनके साथ परिवार के सदस्य भी थे। राधेश्याम सोनी के मुताबिक, नेपाल में सात-आठ दिन रहने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। वे सुरक्षित वापस लौट आए। रक्सौल में भी कारोबारियों की चिंता बढ़ी दूसरी ओर, रक्सौल का बैंक रोड, जो कभी नेपाली ग्राहकों की चहल-पहल से गुलजार रहता था, आज सन्नाटे में डूबा है। दुकानों पर ग्राहक नजर नहीं आ रहे, बाजार की रौनक गायब है और कारोबारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। यहां के कारोबारियों का कहना है, रक्सौल का कारोबार काफी हद तक नेपाल से आने वाले ग्राहकों पर निर्भर है। नेपाल में लोगों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण यहां भी बाजार की रौनक कम हुई है। हालांकि, कारोबारियों को आने वाले त्योहारों से उम्मीद है। उनका कहना है कि नेपाल में बड़े पर्व आने वाले हैं। अगर तब तक स्थिति सामान्य होती है तो लोगों की आवाजाही और खरीदारी बढ़ सकती है। नेपाल में महंगाई का मार भारत-नेपाल सीमा से सटे जोगबनी, विराट नगर और आसपास के भारतीय इलाकों में फिलहाल नेपाल की बाढ़ का सीधा पानी पहुंचने की स्थिति नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां रोजमर्रा का कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है। हालांकि, नेपाल में हालात बिगड़ने के कारण भविष्य को लेकर चिंता जरूर बनी हुई है। नेपाल में आई आपदा के बाद वहां खाने-पीने की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, चीनी, तेल, दाल, चावल और सब्जियों जैसी जरूरत की सामान महंगी हुई हैं। भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले सामानों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ा है। बता दें कि रक्सौल का बाजार सीधे नेपाल के बीरगंज से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी गलियारों में से एक है। भारत और नेपाल के बीच 2025-26 में करीब 9.38 अरब डॉलर का माल व्यापार हुआ। नेपाल के कुल माल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब 62.3% है जबकि नेपाल के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 81.1% रही। बिहार में रक्सौल-बीरगंज और जोगबनी-विराटनगर जैसे बॉर्डर पॉइंट इस व्यापारिक रिश्ते की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं, लेकिन इस समय इन सीमाओं पर व्यापार का सवाल सिर्फ बड़े कारोबार तक सीमित नहीं है। हजारों छोटे दुकानदारों और उनसे जुड़े लोगों की रोजी-रोटी भी इस बात पर टिकी है कि नेपाल से ग्राहक और व्यापारी कितनी जल्दी वापस लौटते हैं।
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