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नवोदय विद्यालयों के लिए तमिलनाडु 3 महीने में जमीन दे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संघीय ढांचे के लिए सहयोग जरूरी, भाषा नीति पर बातचीत करें

By देश | दैनिक भास्कर
September 17, 2026 3 Min Read
Comments Off on नवोदय विद्यालयों के लिए तमिलनाडु 3 महीने में जमीन दे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संघीय ढांचे के लिए सहयोग जरूरी, भाषा नीति पर बातचीत करें
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार को हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने के लिए जमीन देने का निर्देश दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राज्य को यह काम तीन महीने में पूरा करने को कहा। यह निर्देश 15 दिसंबर 2025 के कोर्ट के आदेश के तहत दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगी संघवाद होना चाहिए। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से अपना रुख बदलने और केंद्र के साथ बातचीत करने को कहा। मामला तमिलनाडु में हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने से जुड़ा है। राज्य सरकार नवोदय स्कूलों में लागू तीन-भाषा नीति को लेकर नवोदय स्कूलों स्थापना का विरोध कर रही है। सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के सितंबर 2017 के निर्देश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने में मदद करने का निर्देश दिया था। बेंच ने कहा, “सहयोगी संघवाद होना चाहिए।” कोर्ट ने पूछा, “कल केंद्र सरकार समवर्ती सूची के किसी विषय पर नीति लाती है और हर राज्य यह कहने लगे कि मैं आपकी नीति नहीं मानता, तो हमारे संघीय ढांचे का क्या होगा?” बेंच ने तमिलनाडु सरकार से इस मुद्दे पर अपना नजरिया बदलने को भी कहा। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने राज्य की ओर से बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 15 दिसंबर 2025 के आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन दायर किया गया है। कोर्ट ने कहा, “हम उस आदेश को वापस नहीं ले रहे हैं।” बेंच ने यह भी कहा कि 15 दिसंबर से अब तक राज्य में सरकार बदल चुकी है। इसके बाद बेंच ने कहा, “इन परिस्थितियों में हम याचिकाकर्ता राज्य को 15 दिसंबर 2025 के हमारे आदेश का पालन करने का निर्देश देते हैं। इसके तहत राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने के लिए जरूरी जमीन चिन्हित करनी होगी।” कोर्ट ने कहा कि यह निर्देश राज्य की विशेष अनुमति याचिका के नतीजे के अधीन रहेगा। बेंच ने राज्य सरकार को इस निर्देश का पालन करने के लिए तीन महीने का समय दिया। कोर्ट ने राज्य और केंद्र के प्रतिनिधियों से तमिलनाडु में इन स्कूलों की स्थापना को लेकर आगे बातचीत करने को भी कहा। सुनवाई के दौरान बेंच ने राज्य के वकील से कहा, “पहले आपका नजरिया बदलना चाहिए। अगर आप कहते हैं कि हमें तमिलनाडु की धरती पर हिंदी पढ़ाए जाने की वजह से नवोदय स्कूल नहीं चाहिए...” इस पर जयदीप गुप्ता ने कहा कि राज्य तमिलनाडु में हिंदी की पढ़ाई का बिल्कुल विरोध नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में बड़ी संख्या में स्कूल हैं, जहां हिंदी पढ़ाई जाती है।” केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि राज्य से सिर्फ जमीन उपलब्ध कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “बाकी सब कुछ केंद्र सरकार देखेगी। राज्य सरकार पर बिल्कुल कोई बोझ नहीं होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि भाषा नीति से जुड़ा मुद्दा बातचीत से सुलझाया जा सकता है। बेंच ने दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने को कहा। कोर्ट ने कहा, “चेन्नई के लोगों को दिल्ली से दूर नहीं होना चाहिए और दिल्ली को भी चेन्नई से दूर नहीं होना चाहिए...” बेंच ने सभी पक्षों से मिलकर काम करने पर जोर दिया। बेंच ने कहा, “हम आपको या उन्हें अलग नहीं कर रहे हैं। आपके राज्य में कुछ और तरह के स्कूल आएंगे, जो आपके ऊंचे मानकों को और बेहतर करेंगे। हम इन मानकों से परिचित हैं। इससे आपके मानक कम नहीं होंगे।” सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को तय की है। तमिलनाडु सरकार ने नवोदय विद्यालयों की स्थापना का विरोध किया है। राज्य को इन स्कूलों में लागू तीन-भाषा नीति के पाठ्यक्रम पर आपत्ति है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि नवोदय विद्यालयों की अनुमति देने से राज्य का इनकार छात्रों के शैक्षणिक संस्थान चुनने के अधिकार को सीमित करता है। हाईकोर्ट ने इसे 2009 के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून के खिलाफ भी बताया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2017 को हाईकोर्ट के निर्देशों पर रोक लगा दी थी। 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक के आदेश में बदलाव किया था। कोर्ट ने राज्य को हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने के लिए जरूरी जमीन चिन्हित करने का निर्देश दिया था।
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