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उदयनिधि स्टालिन बोले- हिंदी भाषा के विरोधी नहीं:हम इसे थोपने के खिलाफ हैं; दो-भाषा नीति से राष्ट्रीय एकता को खतरा नहीं

By देश | दैनिक भास्कर
September 18, 2026 3 Min Read
Comments Off on उदयनिधि स्टालिन बोले- हिंदी भाषा के विरोधी नहीं:हम इसे थोपने के खिलाफ हैं; दो-भाषा नीति से राष्ट्रीय एकता को खतरा नहीं
तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि वह हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं हैं। केवल इसे थोपे जाने का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु खुद को भारत से अलग नहीं मानता। राज्य की अपनी भाषाई पहचान है और दो-भाषा नीति राष्ट्रीय एकता के खिलाफ नहीं है। उदयनिधि का बयान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के एक दिन बाद आया। कोर्ट ने तमिलनाडु से जवाहर नवोदय विद्यालयों का विरोध फिर से सोचने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि तमिलनाडु में हिंदी को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता। उदयनिधि ने कहा कि राज्य को नवोदय विद्यालयों की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां वंचित छात्रों के लिए ऐसे स्कूल पहले से चल रहे हैं। कहा- हिंदी सीखना और देशभक्ति बिलकुल अलग उदयनिधि ने हिंदी सीखने और देशभक्ति के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति को राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती नहीं माना जाना चाहिए। उदयनिधि ने कहा, “विविधता में एकता का सम्मान और राज्यों को अपनी पसंद की भाषा नीति अपनाने की अनुमति भारत की एकता को और मजबूत करेगी।” उन्होंने नवोदय विद्यालयों के मुद्दे पर राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। इसमें तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों के खिलाफ प्रस्ताव पास किया जाए। नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर राज्य और केंद्र में विवाद पूरा मामला तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय खोलने को लेकर है। ये केंद्र सरकार की मदद से चलने वाले आवासीय स्कूल हैं। यहां लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ते हैं और छात्रों के रहने की भी व्यवस्था होती है। इन स्कूलों को नवोदय विद्यालय समिति चलाती है। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करती है। राज्य सरकार लंबे समय से इन स्कूलों की स्थापना का विरोध करती रही है। राज्य की मुख्य आपत्ति स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली भाषाओं को लेकर है। नवोदय विद्यालयों में तीन भाषा की व्यवस्था है, जिसमें हिंदी भी शामिल है। वहीं, तमिलनाडु में दो भाषा की नीति लागू है। यहां तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। राज्य सरकार का कहना है कि नवोदय विद्यालयों की भाषा व्यवस्था उसकी नीति से अलग है। राज्य सरकार का यह भी कहना है कि शिक्षा से जुड़े ऐसे नीतिगत फैसलों में राज्य के अधिकार का ध्यान रखा जाना चाहिए। तमिलनाडु में 3 भाषा नीति को लेकर विवाद पुराना हिंदी को लेकर पुराना विवाद: तमिलनाडु में हिंदी के विरोध का लंबा इतिहास रहा है। राज्य में हिंदी को अनिवार्य किए जाने के प्रयासों के खिलाफ 1930 के दशक से आंदोलन होते रहे हैं। तमिलनाडु की दो-भाषा नीति: राज्य के स्कूलों में मुख्य रूप से दो भाषा, तमिल और इंग्लिश पढ़ाई जाती हैं। तमिलनाडु सरकार तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अपनाने का लगातार विरोध करती रही है। NEP 2020 में तीन-भाषा फॉर्मूला: 29 जुलाई 2020 को केंद्र की नई शिक्षा नीति (NEP) लागू की गई। इसमें छात्रों के लिए तीन भाषाएं सीखने की व्यवस्था रखी गई है। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। राज्य सरकार की आपत्ति: तमिलनाडु सरकार का कहना है कि तीन-भाषा व्यवस्था उसकी मौजूदा दो-भाषा नीति से अलग है और वह अपनी दो-भाषा नीति पर कायम रहेगी। ------------------------------ यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट का 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से इनकार:कहा- कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता; CBSE ने इसी सेशन से पॉलिसी लागू की सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…
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