UNESCO वर्ल्ड-हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में भारत की 5 नई साइट:इनमें MP की उदयगिरि गुफाएं, गिन्नौरगढ़, बटेश्वर मंदिर, अबतक देश की 78 साइट दर्ज
UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में भारत की पांच नई साइटें जोड़ी गई हैं। इनमें मध्य प्रदेश के विदिशा, धार, मुरैना और रायसेन जिले की चार साइट हैं। वहीं पांचवीं एंट्री भारत और दक्षिण अफ्रीका से जुड़ी ‘साइट्स ऑफ सत्याग्रह’ है। विदिशा जिले की उदयगिरि गुफाओं, धार जिले में स्थित बाघ गुफा चित्रकारी, मुरैना जिले में चंबल घाटी के मंदिर समूह और रायसेन के गिन्नौरगढ़ किले को शामिल किया गया है। इसके बाद UNESCO टेंटेटिव लिस्ट में अब भारत की 78 साइट हो गई हैं। किसी जगह को पहले UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया जाता है। इसके बाद ही उसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा देने पर विचार होता है। इसलिए इन पांचों साइटों को अभी UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट का अंतिम दर्जा नहीं मिला है। अब इन साइट्स के बारे में विस्तार से जानिए... उदयगिरि गुफाएं, विदिशा बाघ गुफा चित्रकारी, धार गिन्नौरगढ़ किला, रायसेन चंबल घाटी के मंदिर समूह, मुरैना 5वीं साइट- ‘Sites of Satyagraha’ पांचवीं एंट्री ‘साइट्स ऑफ सत्याग्रह’ है। यह भारत और दक्षिण अफ्रीका के 9 ऐतिहासिक स्थलों का समूह है। इसका उद्देश्य महात्मा गांधी के सत्याग्रह के विकास और उसकी यात्रा को दिखाना है। सत्याग्रह की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका में हुई और बाद में भारत में यह बड़े अहिंसक आंदोलनों का आधार बना। इन 9 स्थलों में दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट तथा भारत के चंपारण, साबरमती आश्रम, मणि भवन, हरिजन सेवक संघ, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति शामिल हैं। इन जगहों से गांधीजी के सत्याग्रह की शुरुआत, प्रयोग और विकास की कहानी जुड़ी है। UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट क्या होती है? टेंटेटिव लिस्ट यानी संभावित/प्रस्तावित विरासत स्थलों की सूची। किसी देश की ऐसी जगहों को इसमें शामिल किया जाता है जिन्हें वह भविष्य में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल कराने के लिए नामित करना चाहता है। -------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… देश में पहली बार हुई झरनों की गिनती: 10 राज्यों में 14,468 झरने; मणिपुर में सबसे ज्यादा देश की पहली स्प्रिंग सेंसस के दूसरे हिस्से में 10 राज्यों के 14,468 झरनों की गिनती हुई है। इनमें सबसे ज्यादा झरने मणिपुर और महाराष्ट्र में मिले हैं। जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की करीब 15% आबादी यानी लगभग 20 करोड़ लोग सीधे या परोक्ष रूप से झरने के पानी पर निर्भर हैं। पूरी खबर पढ़ें…