सुखबीर की PM से मुलाकात कैसे हुई?:पंजाब में ग्राउंड सर्वे, चंडीगढ़ में हरियाणा CM से सीक्रेट मीटिंग; रात 11 बजे कॉल, बादल सुबह दिल्ली में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणी अकाली दल (बादल) के प्रधान सुखबीर बादल के बीच हुई मीटिंग के सूत्रधार हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हैं। PM मोदी के साथ मीटिंग करने से पहले सुखबीर बादल की सीएम सैनी से चंडीगढ़ में हरियाणा CM निवास 'संत कबीर कुटीर’ में मीटिंग हुई। सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में सुखबीर बादल और सीएम नायब सैनी में विधानसभा चुनाव से पूर्व गठबंधन और लोकसभा में डिलिमिटेशन व महिला आरक्षण बिल पर समर्थन को लेकर चर्चा हुई। दरअसल, भाजपा अकाली दल से लोकसभा में डिलिमिटेशन व महिला आरक्षण बिल पर समर्थन चाहती है और अकाली दल को पंजाब की राजनीति में बने रहने के लिए इस समय भाजपा के सहारे की जरूरत है। इसी मीटिंग में पीएम से मुलाकात का पूरा खाका तैयार हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से हरी झंडी मिलने के बादे प्रधानमंत्री मोदी से सुखबीर बादल की बैठक फिक्स करवाई गई। फिर गुरूवार रात 11 बजे सुखबीर बादल को PMO से कॉल आई और वह दिल्ली पहुंच गए। सुखबीर बादल को सर्वे में क्या सच्चाई मिली:- CM सैनी से सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ? रात को PMO से फोन, सुबह सुखबीर दिल्ली पहुंचे:- आखिर में जानिए, इस पर अकाली दल व BJP का क्या कहना… चीमा बोले- सैनी से मीटिंग हुई, बाकी सुखबीर बताएंगे
इस पूरे मामले पर अकाली दल के सीनियर नेता व पूर्व मंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने कहा- सुखबीर बादल की सीएम नायब सैनी से मुलाकात हुई है, लेकिन उस मुलाकात में क्या हुआ, इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। सुखबीर बादल की पीएम से मीटिंग में क्या बातें हुईं, यह तभी पता चलेगा जब सुखबीर बादल वापस आएंगे और पार्टी नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा- ये जरूरी नहीं कि पीएम से मुलाकात गठबंधन के लिए ही हो। पार्टी जो भी फैसला लेगी, उसमें सभी की राय ली जाएगी। भाजपा के साथ अकाली दल ने 10 साल सरकार चलाई है, इसलिए भाजपा नेताओं के साथ संबंध स्वाभाविक हैं। भाजपा नेता बोले- हमें कुछ नहीं कहना
पंजाब में भाजपा नेताओं का पक्ष जानने के लिए कई सीनियर नेताओं को फोन किए गए। उनका कहना था कि पार्टी हाईकमान ने पंजाब भाजपा के नेताओं को दो टूक कह दिया कि अकाली दल के साथ गठबंधन होगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई बात नहीं करेगा। नेताओं का कहना है कि भाजपा गठबंधन की बात करके बैकफुट पर नहीं आना चाहती है। भाजपा इस बार बराबर की पार्टनरशिप पर गठबंधन करने का दबाव बना रही है, इसके लिए शिअद की कुछ मांगों को पूरा किया जा सकता है।