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भारतीय सेना अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीदेगी:सेकेंड्स में दुश्मन के टैंक तबाह होंगे; दागते ही टारगेट को खुद ढूंढ लेगी

By देश | दैनिक भास्कर
August 28, 2026 2 Min Read
Comments Off on भारतीय सेना अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीदेगी:सेकेंड्स में दुश्मन के टैंक तबाह होंगे; दागते ही टारगेट को खुद ढूंढ लेगी
भारतीय सेना अमेरिका से जैवलिन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीद रही है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को बताया कि, इसे खरीदने के लिए भारतीय सेना की ओर से लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर साइन कर दिए गए हैं। जैवलिन एक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं और यह बख्तरबंद वाहनों जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। एक बार दागने के बाद मिसाइल खुद ही थर्मल टेंपरेचर से टारगेट को ढूंढ लेती है और उसे हिट करती है। भारत कितने जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है और इस सौदे की कुल कीमत कितनी है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जैवलिन मिसाइल सिस्टम क्या है, कैसे काम करता है, कितने मिलेंगे…5 सवाल-जवाब जैवलिन मिसाइल सिस्टम क्या है, कितनी रेंज है? Javelin (FGM-148) अमेरिका में बना एक मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसकी अधिकतम प्रभावी रेंज करीब 4 किलोमीटर है। जैवलिन को किसने बनाया है? जेवलिन को लॉकहीड मार्टिन और रिदियॉन के जॉइंट वेंचर Javelin Joint Venture (JJV) ने डेवलप किया है। दोनों कंपनियां मिलकर इसका उत्पादन करती हैं। यह कैसे काम करता है? जेवलिन की सबसे खास तकनीक “फायर एंड फॉरगेट” है। यानी लॉन्च से पहले सिस्टम लक्ष्य को पहचानकर उस पर लॉक करता है और मिसाइल दागे जाने के बाद उसे ऑपरेटर को लगातार नियंत्रित करने की जरूरत नहीं होती। मिसाइल खुद लक्ष्य तक पहुंचती है। इसमें इन्फ्रारेड सीकर लगा होता है, जिससे यह दिन-रात और अलग-अलग मौसम में लक्ष्य को ट्रैक कर सकती है। जेवलिन टॉप-अटैक मोड में लक्ष्य के ऊपर से हमला कर सकती है, जहां टैंक का कवच आमतौर पर अपेक्षाकृत कमजोर होता है। जरूरत के मुताबिक यह डायरेक्ट-अटैक भी कर सकती है। भारत को कितनी मिसाइल मिलेंगी? अमेरिकी दस्तावेज के मुताबिक, भारत ने 100 FGM-148 जेवलिन मिसाइल राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट (LwCLU) या Block 1 कमांड लॉन्च यूनिट मांगी थीं। हालांकि फाइनल डील कितने पर हुई है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह मिसाइल भारत के लिए क्यों अहम है? भारत के लिए जैवलिन की अहमियत मुख्य रूप से एंटी-आर्मर क्षमता बढ़ाने में है। खासकर पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में छोटे दलों के लिए पोर्टेबल एंटी-टैंक सिस्टम उपयोगी हो सकता है। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत: 100+ सुखोई-30MKI भी अपग्रेड होंगे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
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By देश | दैनिक भास्कर
August 28, 2026 2 Min Read
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भारतीय सेना अमेरिका से जैवलिन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीद रही है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को बताया कि, इसे खरीदने के लिए भारतीय सेना की ओर से लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर साइन कर दिए गए हैं। जैवलिन एक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं और यह बख्तरबंद वाहनों जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। एक बार दागने के बाद मिसाइल खुद ही थर्मल टेंपरेचर से टारगेट को ढूंढ लेती है और उसे हिट करती है। भारत कितने जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है और इस सौदे की कुल कीमत कितनी है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जैवलिन मिसाइल सिस्टम क्या है, कैसे काम करता है, कितने मिलेंगे…5 सवाल-जवाब जैवलिन मिसाइल सिस्टम क्या है, कितनी रेंज है? Javelin (FGM-148) अमेरिका में बना एक मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसकी अधिकतम प्रभावी रेंज करीब 4 किलोमीटर है। जैवलिन को किसने बनाया है? जेवलिन को लॉकहीड मार्टिन और रिदियॉन के जॉइंट वेंचर Javelin Joint Venture (JJV) ने डेवलप किया है। दोनों कंपनियां मिलकर इसका उत्पादन करती हैं। यह कैसे काम करता है? जेवलिन की सबसे खास तकनीक “फायर एंड फॉरगेट” है। यानी लॉन्च से पहले सिस्टम लक्ष्य को पहचानकर उस पर लॉक करता है और मिसाइल दागे जाने के बाद उसे ऑपरेटर को लगातार नियंत्रित करने की जरूरत नहीं होती। मिसाइल खुद लक्ष्य तक पहुंचती है। इसमें इन्फ्रारेड सीकर लगा होता है, जिससे यह दिन-रात और अलग-अलग मौसम में लक्ष्य को ट्रैक कर सकती है। जेवलिन टॉप-अटैक मोड में लक्ष्य के ऊपर से हमला कर सकती है, जहां टैंक का कवच आमतौर पर अपेक्षाकृत कमजोर होता है। जरूरत के मुताबिक यह डायरेक्ट-अटैक भी कर सकती है। भारत को कितनी मिसाइल मिलेंगी? अमेरिकी दस्तावेज के मुताबिक, भारत ने 100 FGM-148 जेवलिन मिसाइल राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट (LwCLU) या Block 1 कमांड लॉन्च यूनिट मांगी थीं। हालांकि फाइनल डील कितने पर हुई है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह मिसाइल भारत के लिए क्यों अहम है? भारत के लिए जैवलिन की अहमियत मुख्य रूप से एंटी-आर्मर क्षमता बढ़ाने में है। खासकर पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में छोटे दलों के लिए पोर्टेबल एंटी-टैंक सिस्टम उपयोगी हो सकता है। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत: 100+ सुखोई-30MKI भी अपग्रेड होंगे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
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