नोएडा मजदूर प्रोटेस्ट- छात्रा आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द:हाईकोर्ट बोला- सरकार की कहानी मनगढ़ंत, डीएम सैलरी से 5 लाख मुआवजा दें
नोएडा में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उनके खिलाफ जारी डिटेंशन ऑर्डर को रद्द कर दिया। लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने कहा- आकृति की हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई एक 'गढ़ी हुई कहानी' पर आधारित थी। अगर किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने आकृति को 5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। रुपए नोएडा DM मेधा रूपम के वेतन से देने को कहा है। इससे पहले, मंगलवार को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा था। पूछा था- FIR से पहले शांति भंग की नोटिस दी गई थी या नहीं। कोर्ट ने मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और वॉट्सऐप चैट की भी डिटेल मांगी थी। दरअसल, 13 अप्रैल 2026 को यूपी के नोएडा में मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस केस में लखनऊ के जर्नलिस्ट सत्यम वर्मा और नोएडा की एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर NSA लगाया गया। इन पर सोशल मीडिया पर मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग जैसे आरोप लगाए गए थे। आकृति को 11 अप्रैल को मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। 3 महीने पहले भास्कर रिपोर्ट में भी यही सवाल उठे थे नोएडा में प्रदर्शन के बाद दैनिक भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट करवाई थी। 3 महीने पहले भी यही सवाल उठे थे, जो आज कोर्ट ने सरकार से पूछे। भास्कर ने पूछा था- आकृति को 11 अप्रैल को ही मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया, तो उसने 13 अप्रैल को हिंसा कैसे भड़का दी? इसके अलावा ये सवाल भी उठे थे…. कोर्ट ने कहा- ऐसा लग रहा गिरफ्तारी के बाद नोटिस की कार्रवाई की गई यूपी सरकार ने कोर्ट में कहा कि आकृति चौधरी को 12 अप्रैल सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस भी दिया । आरोप है कि आकृति ने मजदूरों की भीड़ को आगजनी और पथराव के लिए उकसाया था। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने पूछा कि क्या आकृति को इससे पहले BNSS की धारा 126 के तहत नोटिस दिया गया था। सरकार ने इससे इनकार किया। BNSS की धारा 126 शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी है। जज ने कहा कि धारा 130 के तहत कार्रवाई से पहले धारा 126 की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। कोर्ट ने पुलिस की सामान्य डायरी में दर्ज जानकारी भी देखी। इसके बाद कोर्ट ने सरकार के उस दावे में सवाल उठाए, जिसमें बताया गया था कि पहले नोटिस दिया गया और उसके बाद गिरफ्तारी हुई। कोर्ट ने कहा- ऐसा लग रहा है कि पहले आकृति को गिरफ्तार किया गया और बाद में नोटिस की कार्रवाई की गई। कोर्ट ने मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोपों पर भी सवाल उठाए। इस पर सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के लिए लोग 11 अप्रैल को ही जुटने लगे थे। इस पर जस्टिस श्रीधरन ने पूछा कि अगर 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी, तो उस दिन आकृति ने ऐसी कौन-सी हिंसा भड़काई थी? यानी जो हिंसा हुई, वह आकृति की गिरफ्तारी के बाद हुई। कल कोर्ट ने वीडियो दिखाने को कहा था, सरकार ने समय मांगा तो इनकार किया आकृति चौधरी के बारे में जानिए- ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी के 3.5 लाख कर्मचारियों की सैलरी 7 हजार बढ़ी:50 लाख तक बीमा मिलेगा; योगी ने आउटसोर्स सेवा निगम की शुरुआत की यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की वेबसाइट का बुधवार को सीएम योगी ने लोकार्पण किया। उन्होंने निगम के लोगो (Logo) का अनावरण करने के साथ आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी बांटे। निगम के शुरू होने के साथ प्रदेश के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। पढ़ें पूरी खबर