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सरकार बोली- मैरिटल रेप को अपराध बनाना संसद का काम:सुप्रीम कोर्ट का नहीं; मामले में 3 हफ्ते बाद अंतिम सुनवाई

By देश | दैनिक भास्कर
September 9, 2026 1 Min Read
Comments Off on सरकार बोली- मैरिटल रेप को अपराध बनाना संसद का काम:सुप्रीम कोर्ट का नहीं; मामले में 3 हफ्ते बाद अंतिम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा कि मैरिटल रेप को अलग अपराध बनाना संसद और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का विषय है, सुप्रीम कोर्ट का नहीं। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना बेंच ने मामले की अंतिम सुनवाई 3 हफ्ते बाद शुरू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बुधवार और गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के लिए तय किया है। दरअसल, पूरा मामला पत्नी की इच्छा के खिलाफ पति के संबंध बनाने को रेप मानने को लेकर है। मौजूदा कानून के अनुसार, अगर पत्नी की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा है, तो उसकी इच्छा के खिलाफ संबंध रेप नहीं माना जाएगा। इसे मैरिटल रेप की कानूनी छूट कहा जाता है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा यह मामला पहले 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट के दो जजों ने इस पर अलग-अलग राय दी थी। जस्टिस राजीव शकधर ने मैरिटल रेप की छूट को असंवैधानिक माना था। वहीं, जस्टिस सी. हरिशंकर ने इस छूट को सही माना था और कहा था कि पति-पत्नी के रिश्ते को कानून में अलग तरीके से देखने का आधार है। दोनों जजों की अलग-अलग राय के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।
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