भारत में 16 साल के लंबे अंतराल के बाद जनगणना की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है। यह केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ते राष्ट्र की एक बड़ी परीक्षा है। 1 से 15 मई तक चलने वाली स्व-गणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया इसका पहला चरण है, जिसमें नागरिक स्वयं पोर्टल या ऐप के माध्यम से अपने मकान और परिवार की जानकारी दर्ज कर रहे हैं। हालांकि, तकनीक के इस सफर में बाड़मेर की स्थिति फिलहाल चिंताजनक है। प्रदेश में बाड़मेर स्व-गणना के मामले में 25वें नंबर पर पिछड़ रहा है। शुरुआती तीन दिनों के आंकड़ों के अनुसार करीब 3,000 से अधिक लोगों ने डिजिटल माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज की है। लेकिन एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि 700 से ज्यादा लोगों ने मोबाइल नंबर से लॉग-इन तो किया, लेकिन नंबर की एंट्री और ई-केवाईसी की प्रक्रिया के बाद इसे अधूरा छोड़ दिया। तकनीकी सवालों और आधार ऑथेंटिकेशन के स्टेप पर आकर अधिकांश लोग अटक रहे हैं। अब इन अधूरी गणनाओं को 16 मई से प्रगणक घर-घर जाकर पूरा करेंगे। स्व-गणना: 3 स्टेप्स में ऐसे पूरी करें प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से डेटा भरने पर समय की बचत होती है और गलतियों की संभावना कम रहती है। इसे आप इन चरणों में पूरा कर सकते हैं।
> अपने पास मुखिया का मोबाइल से लिंक कार्ड, मोबाइल नंबर और मकान का ब्यौरा (स्वामित्व, कमरे, बिजली-पानी की सुविधा) रखें।
>आधिकारिक पोर्टल या ऐप पर मोबाइल नंबर और ओटीपी से वेरिफिकेशन करें। इसके बाद आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए ई-केवाईसी पूरी करें।
>घर का प्रकार (कच्चा/पक्का), शौचालय, पानी-बिजली और परिवार के सभी सदस्यों की उम्र, व्यवसाय व वैवाहिक स्थिति की जानकारी भरकर फाइनल सबमिट करें। 16 मई से डोर-टू-डोर सर्वे, प्रगणक आपके घर आएंगे स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद 16 मई से प्रगणक आपके घर पहुंचेंगे। वे आपके द्वारा ऑनलाइन भरी गई जानकारी का मिलान कर उसे अप्रूव करेंगे। जिन लोगों ने ऑनलाइन गणना नहीं की है, उनकी जानकारी प्रगणक मौके पर दर्ज करेंगे। सहायक सांख्यिकी अधिकारी कैलाश ओझा ने बताया कि सोमवार से तहसीलदार और एसडीएम की ट्रेनिंग शुरू होगी। पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। यह स्व-गणना फरवरी 2027 में होने वाली पूर्ण जनगणना के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिससे डिजिटल ढांचे की मजबूती का आकलन किया जा सकेगा।
