डूंगरपुर जिले में उच्च शिक्षा का ढांचा लेक्चरर के रिक्त पदों के कारण चरमरा गया है। जिले के 11 सरकारी कॉलेजों में से 5 ऐसे हैं, जहां एक भी स्थायी व्याख्याता नियुक्त नहीं है। कुल 170 स्वीकृत पदों में से 92 पद खाली पड़े हैं, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अधर में है। पिछले चार सालों में खोले गए 7 नए कॉलेजों में से 5 में स्थायी व्याख्याता नहीं हैं। हालांकि, इन कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं (गेस्ट फैकल्टी) के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है, लेकिन स्थायी शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नए सत्र के लिए कॉलेजों में ऑनलाइन आवेदन भी शुरू हो गए हैं। वर्ष 2021 से पहले डूंगरपुर जिले में केवल 3 सरकारी कॉलेज संचालित थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 11 हो गई है। इन कॉलेजों में व्याख्याताओं के कुल 170 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में केवल 78 व्याख्याता ही कार्यरत हैं। इस प्रकार 92 पद रिक्त होने से शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से राजसेस (राजस्थान सोसायटी फॉर हायर एजुकेशन) के तहत खोले गए 6 कॉलेजों की स्थिति अधिक चिंताजनक है। इन कॉलेजों में प्रिंसिपल से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक के पद खाली पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक और शैक्षणिक दोनों तरह के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
