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सुप्रीम कोर्ट बोला-तमिलनाडु में हिंदी पढ़ाने से नहीं रोक सकते:दिल्ली से अलग-थलग नहीं चेन्नई, राज्य सरकार भाषा पर अपनी सोच बदले

By देश | दैनिक भास्कर
September 17, 2026 3 Min Read
Comments Off on सुप्रीम कोर्ट बोला-तमिलनाडु में हिंदी पढ़ाने से नहीं रोक सकते:दिल्ली से अलग-थलग नहीं चेन्नई, राज्य सरकार भाषा पर अपनी सोच बदले
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार से कहा कि हिंदी को लेकर आपको अपनी सोच बदलने की जरूरत है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी। कोर्ट ने चेन्नई और दिल्ली को एक-दूसरे से अलग-थलग करने की सोच पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि चेन्नई में बैठे लोगों को दिल्ली में बैठे लोगों से अलग नहीं होना चाहिए और न ही दिल्ली को चेन्नई से। कोर्ट की यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। राज्य ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें हर जिले में नवोदय विद्यालय शुरू करने का आदेश दिया गया था। राज्य सरकार का कहना है कि नवोदय विद्यालयों की व्यवस्था उसकी शिक्षा और भाषा नीति से मेल नहीं खाती। नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर राज्य और केंद्र में विवाद सुप्रीम कोर्ट, राज्य और केंद्र ने क्या कहा, पढ़िए… 1. तमिलनाडु सरकार बोली- हमारी अपनी लैंग्वेज पॉलिसी राज्य सरकार के वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि नवोदय विद्यालयों की व्यवस्था राज्य की शिक्षा नीति से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में तीन भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, जबकि राज्य में दो भाषा की पॉलिसी है। गुप्ता ने कहा कि इस व्यवस्था में हिंदी को ज्यादा महत्व मिल सकता है और इससे तमिल भाषा को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि नवोदय विद्यालय सीधे केंद्र सरकार के स्कूल नहीं हैं। इन्हें एक सोसायटी चलाती है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग यानी सहकारी संघवाद का मुद्दा भी उठाया। गुप्ता ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच सहयोग दोनों तरफ से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नवोदय विद्यालयों का खर्च आगे चलकर राज्य सरकार को उठाना पड़ सकता है। गुप्ता ने सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े केंद्र के भुगतान में देरी का भी मुद्दा उठाया। 2. सुप्रीम कोर्ट बोला- केंद्र की योजना अपनाने का मतलब समझौता या झुकना नहीं तमिलनाडु सरकार की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि केंद्र की किसी योजना को अपनाने का मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार केंद्र के सामने झुक रही है। केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। बेंच ने कहा कि राज्य में पहले से जो अच्छा काम हो रहा है, उसके साथ कोई नई व्यवस्था जुड़ने से शिक्षा का स्तर कम नहीं होगा। नवोदय विद्यालय खुलने से छात्रों को पढ़ाई के ज्यादा मौके मिलेंगे। 3. केंद्र सरकार बोली- राज्य को सिर्फ जमीन देनी है केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि राज्य सरकार को स्कूल बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करानी है। बाकी व्यवस्था केंद्र सरकार की ओर से की जाएगी। केंद्र ने कहा कि राज्य को पहले हर जिले में ऐसी जमीन की पहचान करनी होगी, जहां स्कूल बनाया जा सके। तमिलनाडु में 3 भाषा नीति को लेकर विवाद पुराना हिंदी को लेकर पुराना विवाद: तमिलनाडु में हिंदी के विरोध का लंबा इतिहास रहा है। राज्य में हिंदी को अनिवार्य किए जाने के प्रयासों के खिलाफ 1930 के दशक से आंदोलन होते रहे हैं। तमिलनाडु की दो-भाषा नीति: राज्य के स्कूलों में मुख्य रूप से दो भाषा, तमिल और इंग्लिश पढ़ाई जाती हैं। तमिलनाडु सरकार तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अपनाने का लगातार विरोध करती रही है। NEP 2020 में तीन-भाषा फॉर्मूला: 29 जुलाई 2020 को केंद्र की नई शिक्षा नीति (NEP) लागू की गई। इसमें छात्रों के लिए तीन भाषाएं सीखने की व्यवस्था रखी गई है। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। राज्य सरकार की आपत्ति: तमिलनाडु सरकार का कहना है कि तीन-भाषा व्यवस्था उसकी मौजूदा दो-भाषा नीति से अलग है और वह अपनी दो-भाषा नीति पर कायम रहेगी। ------------------------------ यह खबर भी पढ़ें… CJI बोले- राजपाल यादव एक्टिंग में माहिर, भरोसा करना मुश्किल:चेक बाउंस मामले में आखिरी मौका दिया; कोर्ट से 14 बार आदेश, राजपाल ने नहीं माना सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 2 करोड़ रुपए जमा करने के लिए आखिरी बार 2 हफ्ते का समय दिया है। हालांकि, कोर्ट ने उनके पुराने रवैये को लेकर भरोसा जताने में संदेह जाहिर किया। CJI सूर्यकांत ने कहा, “उनके पुराने रवैये को देखते हुए कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? वे बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग करने में माहिर हैं। कोर्ट में भी वही कर रहे हैं।” पूरी खबर पढ़ें…
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