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सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी पर सवाल उठाए:कहा- गुजरात में रोक के बावजूद जहरीली शराब से 600+ मौतें; महाराष्ट्र पॉइजन रूल्स के 2 नियम रद्द

By देश | दैनिक भास्कर
September 19, 2026 3 Min Read
Comments Off on सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी पर सवाल उठाए:कहा- गुजरात में रोक के बावजूद जहरीली शराब से 600+ मौतें; महाराष्ट्र पॉइजन रूल्स के 2 नियम रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शराबबंदी से शराब की लत और जहरीली शराब से होने वाली मौतें खत्म नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि जबरन शराबबंदी, शराब की समस्या का समाधान नहीं है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि गुजरात में दशकों से शराबबंदी लागू हैं, लेकिन जहरीली शराब से हो रही मौतें नहीं रुकीं। मेथनॉल मिली शराब से 10 बड़े हादसों में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। सुप्रीम कोर्ट 18 सितंबर को महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स, 1972 के नियम 18A और 18B रद्द करने का फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने और रखने को नियंत्रित किया गया था। गैर-दवा निर्माताओं को बिक्री से पहले मेथनॉल में रंग और कड़वा पदार्थ मिलाना जरूरी था। कोर्ट ने भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश की हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया। इन घटनाओं में क्रमशः करीब 13 और 15 लोगों की मौत हुई थी। शराब का कारोबार अंडरग्राउंड हुआ कोर्ट ने कहा कि शराब पर पूरी तरह रोक लगाने से शराब का कारोबार भूमिगत हो जाता है। इससे बिना नियंत्रण के बनी जहरीली शराब का चलन बढ़ता है। उन्होंने कहा कि गुजरात ने 1960 से सख्त शराबबंदी लागू कर रखी है। इसके बावजूद मेथनॉल मिली जहरीली शराब ने कई बार गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा किया। फैसले में कहा गया, “भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश में हाल में हुई जहरीली शराब की घटनाओं में करीब 13 और 15 लोगों की मौत हुई। ये घटनाएं अधिकारियों को फिर से जागने और कार्रवाई करने की याद दिलाती हैं।” कोर्ट ने शराबबंदी के पांच नुकसान गिनाए कोर्ट ने शराबबंदी से जुड़े पांच “नुकसान” बताए। इनमें टैक्स से होने वाले राजस्व का नुकसान, शराबबंदी लागू करने पर होने वाला खर्च और अच्छे-खासे पैसे का इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा पुलिस और आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध शराब बनाना और उससे पैदा होने वाला नशीले पदार्थों का खतरा भी इन नुकसानों में शामिल हैं। महाराष्ट्र के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स के नियम 18A और 18B को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने पर रोक लगाई गई थी। गैर-दवा निर्माता को मेथनॉल बेचने से पहले उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाना भी जरूरी किया गया था। ये नियम 1991 में मुंबई के छाया बार से खरीदी गई नकली शराब पीने के बाद हुई मौतों के बाद लागू किए गए थे। कुल 250 लोगों ने यह शराब पी थी, जिनमें से 93 की मौत हो गई थी। बाद में पता चला था कि इन लोगों ने मेथनॉल पी लिया था। मेथनॉल जहर से कम खतरनाक नहीं होता। कोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक और मनमाना बताया। कोर्ट ने कहा कि इनसे उद्योगों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा। कोर्ट के मुताबिक, ये नियम उन मूल समस्याओं का समाधान नहीं करते, जिनसे जहरीली शराब की घटनाएं होती हैं। इनमें मेथनॉल की चोरी, उसका गलत जगह पहुंचना और संस्थागत भ्रष्टाचार शामिल हैं। अवैध शराब की सप्लाई रोकने के निर्देश बेंच ने कई निर्देश जारी किए। इनमें शराब की सप्लाई और मांग की कड़ी तोड़ने की जरूरत बताई गई। कोर्ट ने अवैध तरीके से शराब ले जाने पर रोक के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने को भी कहा। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम के कई स्कूल परिसर खुले मैदान होते हैं। इनका इस्तेमाल अक्सर अवैध शराब रखने के लिए किया जाता है। कोर्ट ने सरकारों को केमिकल सॉल्वेंट बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों की निगरानी की सलाह दी। ऐसी इकाइयां इन सॉल्वेंट को अवैध रूप से शराब बनाने वालों को बेचती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेथनॉल की ढुलाई अलग टैंकरों या कंटेनरों में की जानी चाहिए। इससे मेथनॉल की चोरी या उसकी जगह दूसरा पदार्थ भरने की संभावना खत्म होगी।
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