Skip to content
Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/

इलेक्शन कमीशन बोला- SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से हुए:चुनाव आयुक्तों की अलग-अलग राय सामान्य; भाजपा बोली- यही स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी

By देश | दैनिक भास्कर
September 23, 2026 6 Min Read
Comments Off on इलेक्शन कमीशन बोला- SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से हुए:चुनाव आयुक्तों की अलग-अलग राय सामान्य; भाजपा बोली- यही स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मीडिया इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखा है। आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि कई सदस्यों वाले संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य है। आयोग ने कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले सदस्यों की सर्वसम्मति से हुए हैं। दूसरी तरफ, BJP ने भी कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय होना स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है। दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटा से मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के दावे और उस पर चुनाव आयोग का जवाब 1. 14 आपत्तियों पर रिपोर्ट और EC की सफाई रिपोर्ट: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-व्यवस्था सामान्य और लगातार चलने वाली प्रक्रिया हैं। इनका मकसद पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करना है। आयोग ने कहा कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुसार हुए हैं। 2. वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने पर सवाल रिपोर्ट: दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया से भी जुड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से जुड़ी अपीलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। EC का जवाब: आयोग ने कहा कि वोटरों के रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने का काम इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO) जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत करते हैं। 3. वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण पर सवाल रिपोर्ट: संधू और जोशी ने वोटर डेटाबेस तक पहुंच को धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाए। जोशी ने यह सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट का सुझाव दिया था कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव केवल अधिकृत अधिकारी ही कर सकें। EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि उसके ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ रोकने के लिए IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल लागू हैं। 4. नए वोटरों से जुड़े कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताने का मामला रिपोर्ट: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों से जुड़े कुछ कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताया था। EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप हुए हैं। आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए ऑपरेशनल सवाल और सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। 5. फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति रिपोर्ट: दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति जताई थी। विवेक जोशी ने कहा था कि चुनाव नियमों में बदलाव किए बिना फॉर्म-6 में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में संधू ने भी इस पर आपत्ति दर्ज की। EC का जवाब: आयोग की प्रेस रिलीज में फॉर्म-6 का जिक्र नहीं है। 6. गोवा में 97 वोटरों का मामला रिपोर्ट: गोवा के एक मामले में 97 ऐसे वोटर, जिन्हें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने पात्र माना था, सॉफ्टवेयर की समस्या के कारण अंतिम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ सके। रिपोर्ट में इसे डेटा सिस्टम के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंता के उदाहरण के तौर पर बताया गया। EC का जवाब: चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज में गोवा के इन 97 वोटरों के मामले पर अलग से कोई जवाब नहीं दिया गया। BJP बोली- अलग राय लोकतंत्र का हिस्सा BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग राय सामने आने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अगर आयोग के सदस्य आपस में विचार-विमर्श नहीं करेंगे तो विपक्ष उन पर सरकार की हां में हां मिलाने का आरोप लगाएगा। चुनाव आयोग में फैसलों पर कानून में क्या प्रावधान है? CEC और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के मुताबिक, आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। अगर सदस्यों की राय अलग हो, तो मामला बहुमत की राय के आधार पर तय किया जाता है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कार्रवाई की मांग की इधर, रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने विवाद को ‘ज्ञानेशगेट’ नाम दिया। विपक्षी नेताओं के बयान पढ़िए… राहुल गांधी: मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। ये राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। टाइम आएगा। हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो। सपा प्रमुख अखिलेश यादव- सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल- वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार सिर्फ ERO को है, फिर दिल्ली में बैठे लोग पूरे देश की वोटर लिस्ट कैसे बदल रहे हैं? ज्ञानेश कुमार को हटाने को लेकर विपक्ष की मांग पुरानी अप्रैल 2026 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया है। इसमें ‘साबित कदाचार’ का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने SIR के दौरान असली वोटर्स के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी। इससे पहले लोकसभा में भी हटाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इसे खारिज कर दिया था। पहले भी चुनाव आयोग में आयुक्तों के बीच मतभेद के मामले आए 1993-95: टीएन शेषन Vs एमएस गिल-जीवीजी कृष्णमूर्ति 1993 में दो और चुनाव आयुक्त नियुक्त होने से आयोग बहुसदस्यीय हो गया। तत्कालीन CEC टीएन शेषन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 14 जुलाई 1995 को कोर्ट ने बहुसदस्यीय आयोग को बरकरार रखा। इस दौरान शेषन और साथी आयुक्तों के बीच अधिकारों और कामकाज को लेकर मतभेद भी सामने आए। 2009: CEC ने साथी आयुक्त को हटाने की सिफारिश की जनवरी 2009 में CEC एन. गोपालस्वामी ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति से की। उन्होंने चावला पर पक्षपात का आरोप लगाया। राष्ट्रपति ने सिफारिश नहीं मानी। चावला बाद में अप्रैल 2009 में CEC बने। 2019: अशोक लवासा की अलग राय 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह से जुड़े आचार संहिता के कुछ मामलों में बहुमत से अलग राय रखी। उन्होंने इसे आदेशों में दर्ज करने की मांग की। 21 मई 2019 को आयोग ने 2:1 से तय किया कि ऐसी असहमति अंतिम आदेश में सार्वजनिक नहीं होगी, लेकिन फाइल में दर्ज की जा सकती है। इसके बाद लवासा ने आचार संहिता से जुड़ी कुछ बैठकों से खुद को अलग कर लिया। 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई। तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे। --------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट जज एकमत नहीं:एक ने कहा- 5 जजों की संविधान पीठ करे सुनवाई, दूसरे ने विरोध किया मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बंटा हुआ फैसला दिया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच को यह तय करना था कि केस बड़ी (पांच जजों की) बेंच को भेजा जाए या नहीं। पूरी खबर पढ़ें…
Author

देश | दैनिक भास्कर

Follow Me
Other Articles
Previous

कांग्रेस बोली- भाजपा प्रत्याशी जन्म से पहले 10वीं पास हुईं:नंदीग्राम उपचुनाव हलफनामे में जन्म 1966, 10वीं 1965 में पास की; उम्मीदवारी रद्द करने की मांग

Next

पेपर लीक आरोपी का बेटा 2साल NEET नहीं दे सकेगा:NTA ने लगाया बैन, पिता को CBI ने गिरफ्तार किया है

हाल की खबरें

  • तमिलनाडु: हाईवे बोर्ड पर हिंदी लिखने पर 2 अधिकारी सस्पेंड:तमिल-अंग्रेजी में जगहों के नाम लिखने का नियम; 2026 में तीसरी बार हिंदी शब्द मिटाए गए
  • भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर
  • भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर
  • भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर
  • भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर

हाल की टिप्पणियाँ

No comments to show.

समाचार संग्रह

  • October 2026
  • September 2026
  • August 2026
  • July 2026

श्रेणियाँ

  • Uncategorized
  • खेल

Contact Us:

Address:
267/463 SEC-26, PRATAP NAGAR,
SANGANER, JAIPUR,
RAJASTHAN - 302033

Phone: +91 99296 80280
Email: info@poltixinsight.com

About US:

Poltix Insight is an independent digital news platform delivering accurate, unbiased coverage of Indian politics, governance, elections, economy, and current affairs with reliable reporting and in-depth analysis.

Copyright 2026 — Poltix Insight. All rights reserved. Blogsy WordPress Theme