पूर्व पत्रकार तरुण तेजपाल रेप केस में दोषी करार:बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा; 2013 में साथी पत्रकार ने आरोप लगाया था
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल को रेप केस में दोषी करार दिया है। उन्हें आज ही सजा सुनाई जाएगी। तेजपाल को मई 2021 में ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार की बेंच ने तीन दिन की अंतिम सुनवाई के बाद 30 जुलाई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। दरअसल, 7-8 नवंबर 2013 में तहलका की साथी महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर गोवा में थिंकफेस्ट इवेंट के दौरान एक होटल की लिफ्ट में सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया था। 2021 में ट्रायल कोर्ट ने बरी किया था 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने बरी करते हुए कहा था कि महिला का व्यवहार यौन शोषण पीड़ित जैसा नहीं लग रहा। बचाव पक्ष ने कहा था कि महिला के बयान में विरोधाभास हैं। बचाव पक्ष ने लिफ्ट वाले दावे को तकनीकी रूप से गलत बताया और कहा था कि सीसीटीवी में महिला को खींचने के विजुअल नहीं थे। साथ ही, आरोप लगाया कि फेलोशिप पाने के लिए झूठा केस दर्ज किया गया। गोवा सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत था और उसने पीड़ित पर ही सवाल उठाए। 13 साल में 2 फैसले, एक बार बरी पत्रकारिता करते हुए पब्लिशर भी बने तेजपाल देश के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार रहे हैं। उनके पास पत्रकारिता का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। साल 1980 में 'द इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। इसके बाद 'इंडिया-2000' नाम की एक मैगजीन में नौकरी करने के लिए वे नई दिल्ली आ गए। 1984 में वे बतौर सीनियर सब-एडिटर 'इंडिया टुडे' मैगजीन के लिए काम करने लगे। 1994 में फाइनेंशियल एक्सप्रेस को जॉइन कर लिया। इसके बाद वे 'आउटलुक पत्रिका' के साथ जुड़े और अगले कई सालों तक वहीं काम करते रहे। इसी दौरान उन्होंने खुद की पब्लिशिंग कंपनी इंडिया इंक' शुरू की। ये वही कंपनी है, जिसने 1998 में अरुंधति रॉय का उपन्यास द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' छापा था। जिसे बुकर प्राइज मिला था। आउटलुक’ छोड़ने के बाद मार्च 2000 में उन्होंने एक अन्य पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर ऑनलाइन इंवेस्टिगेटिव वेबसाइट ‘तहलका डॉट कॉम’ शुरू की। साल 2004 में ये एक टैब्लॉइड न्यूजपेपर में तब्दील हो गई, वहीं 2007 में इसे मैगजीन का रूप दे दिया गया।