Skip to content
Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

Poltix Insight Poltix Insight Poltix Insight

तथ्य, विश्लेषण और भरोसा

  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • भारत
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • फाइनेंस
  • खेल
  • विज्ञान-टेक्नोलॉजी
  • सोशल
  • मत एवं विश्लेषण
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण का मामला उठाया:बोला- हम किसी धर्म-त्योहार के नहीं, शोर के खिलाफ; राज्य सरकार से गाइडलाइन मांगी

By देश | दैनिक भास्कर
September 21, 2026 3 Min Read
Comments Off on बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण का मामला उठाया:बोला- हम किसी धर्म-त्योहार के नहीं, शोर के खिलाफ; राज्य सरकार से गाइडलाइन मांगी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर खुद नोटिस लेते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वह किसी धर्म या त्योहार के खिलाफ नहीं है। चिंता केवल त्योहारों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाले शोर को लेकर है। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने डीजे, साउंड सिस्टम और लाउडस्पीकर से होने वाले शोर पर चिंता जताई। बेंच ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार 22 सितंबर को तय की है। हाईकोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों की जानकारी देने का निर्देश दिया। यह भी बताने को कहा कि मूर्ति विसर्जन जुलूसों के दौरान इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। जुलूसों में शोर-वायु प्रदूषण पर भी निशाना साधा बॉम्बे हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले शोर और वायु प्रदूषण पर भी ध्यान दिया। साथ ही DJ और रंगीन धुआं छोड़ने वाले पटाखों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि त्योहारों का जश्न नागरिकों के अधिकारों की कीमत पर नहीं मनाया जा सकता। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक उत्सव संवैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकते। जश्न जरूर मनाए जाने चाहिए, लेकिन वे हजारों नागरिकों के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करके नहीं मनाए जा सकते, जो इससे गंभीर रूप से और बुरी तरह प्रभावित होते हैं और चुपचाप परेशानी झेलते हैं। आधी रात तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की परमिशन पर भी सवाल बेंच ने कहा, "हमें इन जुलूसों में आधी रात यानी 12:00 बजे तक इतना तेज संगीत बजाने की इजाजत देने में कोई तर्क समझ नहीं आता, जबकि हमें बताया गया है कि ऐसे जुलूसों के लिए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट, लाउडस्पीकर और एम्पलीफायर के इस्तेमाल की इजाजत सिर्फ रात 10 बजे तक ही होती है।" कोर्ट ने कहा कि हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए वह पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने पर विचार कर रहा है। बेंच ने कहा, "मुंबई में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए, यह सही समय है कि शोर और वायु प्रदूषण फैलाने वाले और हवा को जहरीला बनाने वाले पटाखों पर रोक लगाई जाए, ताकि एक स्वस्थ वातावरण बनाया जा सके।" कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश में उठाए गए मुद्दों पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। पटाखे 140-175 डीबी, बड़े लाउडस्पीकर 100-120 डीबी का शोर पैदा करते हैं ध्वनि की तीव्रता डेसीबल (dB) में मापी जाती है। 85 डेसीबल से ज्यादा की आवाज में लंबे समय तक रहना स्थायी बहरेपन का कारण बन सकता है, क्योंकि कान की कोशिकाएं बहुत नाजुक होती हैं। एक सामान्य पटाखा 140 dB से 175 dB तक की आवाज पैदा कर सकता है। यह स्तर तत्काल कान के पर्दे फाड़ने और स्थायी बहरेपन के लिए पर्याप्त है। त्यौहारों या कार्यक्रमों में बजने वाले बड़े साउंड सिस्टम आमतौर पर 100 dB से 120 dB तक पहुंच जाते हैं। इतने शोर में लंबे समय तक रहने से स्थायी श्रवण क्षति की संभावना बहुत ज्यादा होती है। 140 dB तक का शोर "पीड़ा की दहलीज" है, जिससे कान का पर्दा फट सकता है और दिमाग पर असर हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर तुरंत मौत का कारण नहीं बनता। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… जोगेश्वरी के विसर्जन कुंड में फैला करंट, युवक की मौत: लालबाग इलाके में भी गणेश पंडाल के पास करंट से बच्ची-महिला की मौत हुई थी मुंबई के जोगेश्वरी ईस्ट में एक और व्यक्ति की करंट लगने की घटना सामने आई। यह घटना लिली व्हाइट बिल्डिंग के पास श्यामनगर तालाब में दोपहर 12:20 बजे हुई। जहां गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए 5 कृत्रिम कुंड बनाए गए थे। इनमें से 4 कुंड आधी रात के बाद बंद कर दिए गए थे। पढ़ें पूरी खबर…
Author

देश | दैनिक भास्कर

Follow Me
Other Articles
Previous

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण का मामला उठाया:बोला- हम किसी धर्म-त्योहार के नहीं, शोर के खिलाफ; राज्य सरकार से गाइडलाइन मांगी

Next

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण का मामला उठाया:बोला- हम किसी धर्म-त्योहार के नहीं, शोर के खिलाफ; राज्य सरकार से गाइडलाइन मांगी

हाल की खबरें

  • तमिलनाडु: हाईवे बोर्ड पर हिंदी लिखने पर 2 अधिकारी सस्पेंड:तमिल-अंग्रेजी में जगहों के नाम लिखने का नियम; 2026 में तीसरी बार हिंदी शब्द मिटाए गए
  • तमिलनाडु: हाईवे बोर्ड पर हिंदी लिखने पर 2 अधिकारी सस्पेंड:तमिल-अंग्रेजी में जगहों के नाम लिखने का नियम; 2026 में तीसरी बार हिंदी शब्द मिटाए गए
  • तमिलनाडु: हाईवे बोर्ड पर हिंदी लिखने पर 2 अधिकारी सस्पेंड:तमिल-अंग्रेजी में जगहों के नाम लिखने का नियम; 2026 में तीसरी बार हिंदी शब्द मिटाए गए
  • भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर
  • भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर

हाल की टिप्पणियाँ

No comments to show.

समाचार संग्रह

  • October 2026
  • September 2026
  • August 2026
  • July 2026

श्रेणियाँ

  • Uncategorized
  • खेल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण का मामला उठाया:बोला- हम किसी धर्म-त्योहार के नहीं, शोर के खिलाफ; राज्य सरकार से गाइडलाइन मांगी

By देश | दैनिक भास्कर
September 21, 2026 3 Min Read
Comments Off on बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण का मामला उठाया:बोला- हम किसी धर्म-त्योहार के नहीं, शोर के खिलाफ; राज्य सरकार से गाइडलाइन मांगी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर खुद नोटिस लेते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वह किसी धर्म या त्योहार के खिलाफ नहीं है। चिंता केवल त्योहारों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाले शोर को लेकर है। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने डीजे, साउंड सिस्टम और लाउडस्पीकर से होने वाले शोर पर चिंता जताई। बेंच ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार 22 सितंबर को तय की है। हाईकोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों की जानकारी देने का निर्देश दिया। यह भी बताने को कहा कि मूर्ति विसर्जन जुलूसों के दौरान इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। जुलूसों में शोर-वायु प्रदूषण पर भी निशाना साधा बॉम्बे हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले शोर और वायु प्रदूषण पर भी ध्यान दिया। साथ ही DJ और रंगीन धुआं छोड़ने वाले पटाखों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि त्योहारों का जश्न नागरिकों के अधिकारों की कीमत पर नहीं मनाया जा सकता। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक उत्सव संवैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकते। जश्न जरूर मनाए जाने चाहिए, लेकिन वे हजारों नागरिकों के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करके नहीं मनाए जा सकते, जो इससे गंभीर रूप से और बुरी तरह प्रभावित होते हैं और चुपचाप परेशानी झेलते हैं। आधी रात तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की परमिशन पर भी सवाल बेंच ने कहा, "हमें इन जुलूसों में आधी रात यानी 12:00 बजे तक इतना तेज संगीत बजाने की इजाजत देने में कोई तर्क समझ नहीं आता, जबकि हमें बताया गया है कि ऐसे जुलूसों के लिए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट, लाउडस्पीकर और एम्पलीफायर के इस्तेमाल की इजाजत सिर्फ रात 10 बजे तक ही होती है।" कोर्ट ने कहा कि हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए वह पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने पर विचार कर रहा है। बेंच ने कहा, "मुंबई में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए, यह सही समय है कि शोर और वायु प्रदूषण फैलाने वाले और हवा को जहरीला बनाने वाले पटाखों पर रोक लगाई जाए, ताकि एक स्वस्थ वातावरण बनाया जा सके।" कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश में उठाए गए मुद्दों पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। पटाखे 140-175 डीबी, बड़े लाउडस्पीकर 100-120 डीबी का शोर पैदा करते हैं ध्वनि की तीव्रता डेसीबल (dB) में मापी जाती है। 85 डेसीबल से ज्यादा की आवाज में लंबे समय तक रहना स्थायी बहरेपन का कारण बन सकता है, क्योंकि कान की कोशिकाएं बहुत नाजुक होती हैं। एक सामान्य पटाखा 140 dB से 175 dB तक की आवाज पैदा कर सकता है। यह स्तर तत्काल कान के पर्दे फाड़ने और स्थायी बहरेपन के लिए पर्याप्त है। त्यौहारों या कार्यक्रमों में बजने वाले बड़े साउंड सिस्टम आमतौर पर 100 dB से 120 dB तक पहुंच जाते हैं। इतने शोर में लंबे समय तक रहने से स्थायी श्रवण क्षति की संभावना बहुत ज्यादा होती है। 140 dB तक का शोर "पीड़ा की दहलीज" है, जिससे कान का पर्दा फट सकता है और दिमाग पर असर हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर तुरंत मौत का कारण नहीं बनता। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… जोगेश्वरी के विसर्जन कुंड में फैला करंट, युवक की मौत: लालबाग इलाके में भी गणेश पंडाल के पास करंट से बच्ची-महिला की मौत हुई थी मुंबई के जोगेश्वरी ईस्ट में एक और व्यक्ति की करंट लगने की घटना सामने आई। यह घटना लिली व्हाइट बिल्डिंग के पास श्यामनगर तालाब में दोपहर 12:20 बजे हुई। जहां गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए 5 कृत्रिम कुंड बनाए गए थे। इनमें से 4 कुंड आधी रात के बाद बंद कर दिए गए थे। पढ़ें पूरी खबर…
Author

देश | दैनिक भास्कर

Follow Me
Other Articles
Previous

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण का मामला उठाया:बोला- हम किसी धर्म-त्योहार के नहीं, शोर के खिलाफ; राज्य सरकार से गाइडलाइन मांगी

Next

मिजोरम में UCC लागू करने की मांग:BJP विधायक बोले- गैर-आदिवासियों से शादी में मिजो महिलाओं को ज्यादा कानूनी सुरक्षा मिलेगी

Contact Us:

Address:
267/463 SEC-26, PRATAP NAGAR,
SANGANER, JAIPUR,
RAJASTHAN - 302033

Phone: +91 99296 80280
Email: info@poltixinsight.com

About US:

Poltix Insight is an independent digital news platform delivering accurate, unbiased coverage of Indian politics, governance, elections, economy, and current affairs with reliable reporting and in-depth analysis.

Copyright 2026 — Poltix Insight. All rights reserved. Blogsy WordPress Theme