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पित्रोदा बोले- गरीब-दलित, अल्पसंख्यकों की बात करना दिमागी नक्सल नहीं:मुस्लिम-ईसाई, यहूदी और बौद्धों से पूछिए भारत में कैसा महसूस करते हैं

By देश | दैनिक भास्कर
September 1, 2026 3 Min Read
Comments Off on पित्रोदा बोले- गरीब-दलित, अल्पसंख्यकों की बात करना दिमागी नक्सल नहीं:मुस्लिम-ईसाई, यहूदी और बौद्धों से पूछिए भारत में कैसा महसूस करते हैं
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने पीएम मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और केंद्र सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर कहा कि गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के पक्ष में बोलना नक्सलवाद या कम्युनिज्म नहीं है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में पित्रोदा ने कहा कि इंसानियत को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए और सभी लोग एक ही जगह से आए हैं। वहीं RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर उन्होंने कहा कि मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और यहूदी लोगों से पूछना चाहिए कि वे आज भारत में कैसा महसूस करते हैं। दरअसल, 15 अगस्त के भाषण में मोदी ने कहा था कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया लेकिन दिमागी नक्सल अभी भी मौजूद हैं। भागवत ने अमेरिकी दौरे पर कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। पित्रोदा बोले- 2014 से पहले बनी चीजों का फायदा आज मिल रहा, 6 बड़ी बातें… 1. भागवत के बयान पर- सिर्फ यह कहना काफी नहीं है कि मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और बौद्ध का सम्मान किया जाता है। अगर व्यवहार में इसके उलट होता है तो कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है। किसी के बारे में कही गई बातों से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके साथ किया जाने वाला व्यवहार है। वास्तविक स्थिति समझने के लिए लोगों के अनुभवों को देखना जरूरी है। 2. 2014 से पहले की सरकारों के काम पर- आज देश में जो कई सुविधाएं और संस्थान दिखाई दे रहे हैं, उनमें से बड़ी संख्या पिछले 70 वर्षों में तैयार हुई। पहले की सरकारों से भी गलतियां हुई होंगी, लेकिन देश में बड़ी संख्या में संस्थान और व्यवस्थाएं खड़ी की गईं। IIT और IIM जैसे संस्थानों से निकले लोग आज दुनियाभर में काम कर रहे हैं और यह देश के शुरुआती नेतृत्व द्वारा तैयार की गई व्यवस्था का परिणाम है। 2014 के बाद में ऐसे कौन से बड़े नए संस्थान बनाए गए, जिनकी तुलना उस दौर की संस्थागत विरासत से की जा सके। 3. GDP की 7.8% ग्रोथ पर- सिर्फ GDP बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। यह देखना जरूरी है कि इस आर्थिक वृद्धि का फायदा किसे मिल रहा है। क्या यह विकास देश के आम लोगों तक पहुंच रहा है और क्या इसका लाभ समान रूप से बंट रहा है। 4. राहुल गांधी के समर्थन में- हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ FIR के सवाल पर पित्रोदा ने कांग्रेस नेता का बचाव किया। उन्होंने राहुल गांधी को मजबूत नेता बताते हुए कहा कि उनमें बौद्धिक क्षमता, दृढ़ता, साहस और अपने विचारों पर विश्वास है। राहुल गांधी कांग्रेस की ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ की सोच को सामने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 5. संस्थाओं की स्वतंत्रता पर- सत्ता का बहुत अधिक केंद्रीकरण प्रधानमंत्री कार्यालय में होने से संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर हुई है। न्यायपालिका, चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और स्थानीय पुलिस संस्थाओं को सरकार के खिलाफ स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने में दबाव महसूस होता है। अगर कोई संस्था सरकार के खिलाफ कदम उठाती है तो उस पर कार्रवाई या दबाव का खतरा रहता है। लोकतंत्र में स्वतंत्र संस्थाएं और मजबूत ‘वॉचडॉग’ जरूरी हैं, लेकिन उनके मुताबिक मौजूदा व्यवस्था में ऐसे निगरानी तंत्र कमजोर हुए हैं। 6. संसद के मानसून सत्र पर- संसद में बहस का स्तर देखकर उन्हें निराशा होती है। कई बार सांसद मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय एक-दूसरे पर चिल्लाते नजर आते हैं। राहुल गांधी ने संसद में अच्छा प्रदर्शन किया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रभावी तरीके से अपनी बात रखी। इस दौरान सरकार कई मुद्दों पर दबाव में नजर आई।
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पित्रोदा बोले- गरीब-दलित, अल्पसंख्यकों की बात करना दिमागी नक्सल नहीं:मुस्लिम-ईसाई, यहूदी और बौद्धों से पूछिए भारत में कैसा महसूस करते हैं

By देश | दैनिक भास्कर
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Comments Off on पित्रोदा बोले- गरीब-दलित, अल्पसंख्यकों की बात करना दिमागी नक्सल नहीं:मुस्लिम-ईसाई, यहूदी और बौद्धों से पूछिए भारत में कैसा महसूस करते हैं
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने पीएम मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और केंद्र सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर कहा कि गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के पक्ष में बोलना नक्सलवाद या कम्युनिज्म नहीं है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में पित्रोदा ने कहा कि इंसानियत को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए और सभी लोग एक ही जगह से आए हैं। वहीं RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर उन्होंने कहा कि मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और यहूदी लोगों से पूछना चाहिए कि वे आज भारत में कैसा महसूस करते हैं। दरअसल, 15 अगस्त के भाषण में मोदी ने कहा था कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया लेकिन दिमागी नक्सल अभी भी मौजूद हैं। भागवत ने अमेरिकी दौरे पर कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। पित्रोदा बोले- 2014 से पहले बनी चीजों का फायदा आज मिल रहा, 6 बड़ी बातें… 1. भागवत के बयान पर- सिर्फ यह कहना काफी नहीं है कि मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और बौद्ध का सम्मान किया जाता है। अगर व्यवहार में इसके उलट होता है तो कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है। किसी के बारे में कही गई बातों से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके साथ किया जाने वाला व्यवहार है। वास्तविक स्थिति समझने के लिए लोगों के अनुभवों को देखना जरूरी है। 2. 2014 से पहले की सरकारों के काम पर- आज देश में जो कई सुविधाएं और संस्थान दिखाई दे रहे हैं, उनमें से बड़ी संख्या पिछले 70 वर्षों में तैयार हुई। पहले की सरकारों से भी गलतियां हुई होंगी, लेकिन देश में बड़ी संख्या में संस्थान और व्यवस्थाएं खड़ी की गईं। IIT और IIM जैसे संस्थानों से निकले लोग आज दुनियाभर में काम कर रहे हैं और यह देश के शुरुआती नेतृत्व द्वारा तैयार की गई व्यवस्था का परिणाम है। 2014 के बाद में ऐसे कौन से बड़े नए संस्थान बनाए गए, जिनकी तुलना उस दौर की संस्थागत विरासत से की जा सके। 3. GDP की 7.8% ग्रोथ पर- सिर्फ GDP बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। यह देखना जरूरी है कि इस आर्थिक वृद्धि का फायदा किसे मिल रहा है। क्या यह विकास देश के आम लोगों तक पहुंच रहा है और क्या इसका लाभ समान रूप से बंट रहा है। 4. राहुल गांधी के समर्थन में- हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ FIR के सवाल पर पित्रोदा ने कांग्रेस नेता का बचाव किया। उन्होंने राहुल गांधी को मजबूत नेता बताते हुए कहा कि उनमें बौद्धिक क्षमता, दृढ़ता, साहस और अपने विचारों पर विश्वास है। राहुल गांधी कांग्रेस की ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ की सोच को सामने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 5. संस्थाओं की स्वतंत्रता पर- सत्ता का बहुत अधिक केंद्रीकरण प्रधानमंत्री कार्यालय में होने से संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर हुई है। न्यायपालिका, चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और स्थानीय पुलिस संस्थाओं को सरकार के खिलाफ स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने में दबाव महसूस होता है। अगर कोई संस्था सरकार के खिलाफ कदम उठाती है तो उस पर कार्रवाई या दबाव का खतरा रहता है। लोकतंत्र में स्वतंत्र संस्थाएं और मजबूत ‘वॉचडॉग’ जरूरी हैं, लेकिन उनके मुताबिक मौजूदा व्यवस्था में ऐसे निगरानी तंत्र कमजोर हुए हैं। 6. संसद के मानसून सत्र पर- संसद में बहस का स्तर देखकर उन्हें निराशा होती है। कई बार सांसद मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय एक-दूसरे पर चिल्लाते नजर आते हैं। राहुल गांधी ने संसद में अच्छा प्रदर्शन किया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रभावी तरीके से अपनी बात रखी। इस दौरान सरकार कई मुद्दों पर दबाव में नजर आई।
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