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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:केंद्र बोला- सिर्फ माता-पिता की सैलरी-आय से तय नहीं हो दर्जा; पद-संपत्ति भी देखें

By देश | दैनिक भास्कर
September 1, 2026 3 Min Read
Comments Off on OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:केंद्र बोला- सिर्फ माता-पिता की सैलरी-आय से तय नहीं हो दर्जा; पद-संपत्ति भी देखें
ओबीसी क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से CSE-2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया पुराने OBC क्रीमी लेयर मानदंड के आधार पर करने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में 11 मार्च को OBC क्रीमी लेयर की पहचान को लेकर फैसला दिया था। कोर्ट ने कहा था कि 14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र 8 सितंबर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) को नहीं बदल सकता। सरकार ने कहा- सिर्फ माता-पिता की सैलरी या आय के आधार पर किसी उम्मीदवार को OBC क्रीमी लेयर में शामिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता के पद की स्थिति के साथ आय और संपत्ति को भी देखना जरूरी है। केंद्र की दलील- उम्मीदवारों ने पुराने नियम के तहत परीक्षा दी केंद्र ने कहा कि CSE-2025 की परीक्षा 11 मार्च के फैसले से पहले शुरू हो गई थी। नोटिफिकेशन 22 जनवरी 2025 को आया था। प्रीलिम्स 25 मई और मेन्स 22 से 31 अगस्त 2025 तक हुई। 6 मार्च 2026 को 958 उम्मीदवारों का रिजल्ट आया। इसके पांच दिन बाद 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला आया। केंद्र के मुताबिक, अगर नया फैसला पिछली तारीख से लागू हुआ तो उन उम्मीदवारों के साथ भेदभाव हो सकता है, जिन्होंने पुराने नियमों के आधार पर परीक्षा दी थी। OBC उम्मीदवारों को उम्र और अटेम्प्ट का नुकसान केंद्र ने कहा कि पुराने नियमों के कारण कुछ उम्मीदवार खुद को OBC-NCL के लिए अयोग्य मान सकते थे। खासकर वे, जिनके माता-पिता PSU या निजी कंपनी में काम करते थे और उनकी आय तय सीमा से ज्यादा थी। ऐसे उम्मीदवारों ने जनरल कैटेगरी से परीक्षा दी होगी या OBC में आवेदन नहीं किया होगा। इससे उन्हें OBC-NCL की 3 साल की उम्र छूट और अतिरिक्त प्रयास का लाभ नहीं मिला होगा। वहीं, कुछ उम्मीदवारों ने OBC में आवेदन किया, लेकिन नए फैसले के बाद वे क्रीमी लेयर में आ सकते हैं। इससे पुराने नियम पर भरोसा करने वाले उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार की स्थिति बन सकती है। दोबारा जांच हुई तो पूरी परीक्षा पर असर सरकार ने कहा कि नए फैसले के बाद कई उम्मीदवारों के माता-पिता की नौकरी और पद की दोबारा जांच करनी पड़ सकती है। अगर यह जांच उन लोगों तक भी हुई, जिन्होंने OBC में आवेदन नहीं किया था, तो उनकी कैटेगरी, उम्र में छूट और अतिरिक्त प्रयास जैसे मुद्दे उठेंगे। इससे CSE-2025 की पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करने जैसी स्थिति बन सकती है। सर्विस अलोकेशन में देरी से ट्रेनिंग पर असर केंद्र ने कहा कि चयनित अधिकारियों की आगे की प्रक्रिया तय समय पर होनी है। देरी से मसूरी की LBSNAA में फाउंडेशन कोर्स और ट्रेनिंग प्रभावित हो सकती है। सरकार के अनुसार, सर्विस अलोकेशन में देरी से IAS-IPS कैडर, वरिष्ठता, वेतन और दूसरी सेवाओं की ट्रेनिंग पर भी असर पड़ेगा। इसीलिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया पुराने OBC क्रीमी लेयर नियमों के आधार पर पूरी करने की अनुमति मांगी है। अब विशेष बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा- SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं, यह सिद्धांत सिर्फ OBC और SEBC पर लागू केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। पूरी खबर पढ़ें…
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