अमेरिका में व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान फायरिंग करने वाले आरोपी की होटल रूम में हथियारों के साथ सेल्फी सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी कोल एलन ने हमले से कुछ मिनट पहले ही यह तस्वीर ली थी। जांच में सामने आया कि कोल एलन काफी समय से हमले की तैयारी कर रहा था। उसने पहले से वॉशिंगटन के हिल्टन होटल में कमरा बुक कराया था, जहां यह कार्यक्रम होना था। आरोपी ने उस रात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की गतिविधियों पर नजर रखी। उसने हमले से पहले माफी और सफाई से जुड़े ईमेल भी शेड्यूल कर रखे थे। तस्वीर में वह काले कपड़ों में गन होल्स्टर, गोला बारूद बैग और चाकू लिए नजर आया। इसके कुछ देर बाद उसने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिस दौरान सीक्रेट सर्विस एजेंट्स के साथ गोलीबारी हुई। सरकारी वकीलों ने कोर्ट में कहा कि आरोपी ने जानबूझकर राष्ट्रपति को निशाना बनाने की कोशिश की और वह समाज के लिए गंभीर खतरा है। इसी आधार पर उसे ट्रायल तक हिरासत में रखने की मांग की गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… सांसद ने पूछा- ‘क्या ट्रम्प की दिमागी हालत ठीक है?’, नाराज रक्षामंत्री बोले- बाइडेन से यह क्यों नहीं पूछा था अमेरिका की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई के दौरान एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया। डेमोक्रेट सांसद सारा जैकब्स ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल पूछ लिया। जैकब्स ने अपने सवाल के दौरान ट्रम्प के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किए गए हाल के पोस्ट का जिक्र किया और उनकी भाषा की आलोचना की। इसी दौरान उनके पीछे खड़े एक सहायक ने ट्रम्प के पुराने पोस्ट के कटआउट भी दिखाए। इनमें वह विवादित यीशु वाली AI पोस्ट भी शामिल था, जिसे बाद में हटा दिया गया था। सारा जैकब्स ने सीधा सवाल करते हुए कहा, “क्या आप मानते हैं कि राष्ट्रपति मानसिक रूप से इतने स्थिर हैं कि वे कमांडर-इन-चीफ की जिम्मेदारी निभा सकें?” इस पर पीट हेगसेथ नाराज हो गए। उन्होंने पलटकर पूछा, “क्या आपने यही सवाल चार साल तक जो बाइडन से पूछा था?” हेगसेथ ने कहा कि इसी डेमोक्रेटिक पार्टी ने बाइडेन का तब बचाव किया था जब वे ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। इस पर जैकब्स ने जवाब दिया कि 2024 के चुनाव में बाइडेन “हमारे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं थे।” हेगसेथ ने आगे कहा कि वह इस तरह के सवाल-जवाब में शामिल नहीं होना चाहते हैं। नेपाल एयरलाइंस के मैप में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया, विवाद के बाद माफी मांगी नेपाल एयरलाइंस ने सोशल मीडिया पर साझा नेटवर्क मैप में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पाकिस्तान का हिस्सा दिखा दिया। पोस्ट वायरल होने के बाद वैश्विक स्तर पर विरोध हुआ, जिसके बाद एयरलाइन ने 24 घंटे के भीतर माफी जारी कर इसे ‘मैप की गलती’ बताया। बुधवार को नेपाल एयरलाइंस के सोशल मीडिया हैंडल से एक रूट मैप शेयर किया गया। इस मैप में भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पाकिस्तान के क्षेत्र के रूप में दिखाया गया था। यह पोस्ट X और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो गया। भारतीय यूजर्स ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और एयरलाइन की आलोचना की। विवाद बढ़ने के बाद नेपाल एयरलाइंस ने 24 घंटे के भीतर माफी जारी की। एयरलाइन ने कहा कि यह एक ‘कार्टोग्राफिक इनएक्युरेसी’ थी और भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। मामले को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) और एविएशन मिनिस्ट्री नेपाल के समक्ष कूटनीतिक विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिका ने भारत को 657 प्राचीन कलाकृतियां लौटाईं: 1.4 करोड़ डॉलर की विरासत वापस अमेरिका ने भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन कलाकृतियां लौटाई हैं। ये कलाकृतियां तस्करी नेटवर्क के जरिए विदेश पहुंचाई गई थीं, जिन्हें जांच के बाद बरामद कर वापस किया गया। मैनहटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने मंगलवार को इन कलाकृतियों की वापसी की घोषणा की। ये सभी कलाकृतियां अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच के दौरान बरामद की गईं। जांच में बदनाम आर्ट डीलर सुभाष कपूर और तस्कर नैन्सी वीनर से जुड़े नेटवर्क सामने आए। इन नेटवर्क्स के जरिए भारत समेत कई देशों की सांस्कृतिक धरोहर की चोरी और बिक्री की जाती थी। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की काउंसल राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में कलाकृतियां लौटाई गईं। भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग की सराहना की। लौटाई गई वस्तुओं में 20 लाख डॉलर की अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा शामिल है, जो छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित संग्रहालय से चोरी हुई थी। इसके अलावा मध्य प्रदेश के मंदिर से चोरी की गई नृत्यरत गणेश की मूर्ति भी शामिल है। एक लाल बलुआ पत्थर की बुद्ध प्रतिमा भी वापस की गई है, जिसकी कीमत करीब 75 लाख डॉलर बताई गई। यह प्रतिमा भी तस्करी कर अमेरिका पहुंचाई गई थी। मैनहटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट अब तक 6200 से ज्यादा सांस्कृतिक वस्तुएं बरामद कर चुकी है, जिनकी कुल कीमत 485 मिलियन डॉलर से अधिक है। इनमें से 5900 से ज्यादा वस्तुएं 36 देशों को लौटाई जा चुकी हैं। अधिकारियों ने कहा कि अभी भी कई कलाकृतियां विदेशों में हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए जांच और कार्रवाई जारी रहेगी। घास से ढकी चोंच वाले पक्षी की फोटो बनी लोगों की पसंद: कॉमेडी वाइल्डलाइफ अवॉर्ड में पीपुल्स चॉइस जीता घास से ढके गैनट पक्षी की एक मजेदार तस्वीर ने कॉमेडी वाइल्डलाइफ अवॉर्ड्स में पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड जीत लिया। यह फोटो इंग्लैंड में तेज हवा के दौरान ली गई थी, जिसमें पक्षी का चेहरा घास से ढका नजर आ रहा है। फोटोग्राफर एलिसन टक ने यह तस्वीर इंग्लैंड के यॉर्कशायर स्थित बेम्पटन क्लिफ्स में खींची। तेज हवा के कारण घास पक्षी के चेहरे पर उड़कर आ गई, जिससे यह हास्यपूर्ण दृश्य बन गया। “नाउ विच डायरेक्शन इज माई नेस्ट?” शीर्षक वाली इस फोटो ने शॉर्टलिस्ट की गई 41 तस्वीरों में से सबसे ज्यादा वोट हासिल किए और स्पष्ट अंतर से जीत दर्ज की। टक के मुताबिक, उस दिन तेज समुद्री हवा चल रही थी, जिसके कारण नाव से शूटिंग संभव नहीं थी। हालांकि, यही हवा फोटोग्राफी के लिए फायदेमंद साबित हुई और पक्षी करीब आ गए। टक ने कहा कि 2025 अवॉर्ड्स में उनकी फोटो का चयन होना ही बड़ी बात थी, लेकिन पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड जीतना उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने वोट देने वालों का आभार जताया। शॉर्टलिस्ट में गिलहरी की खराब हेयरस्टाइल, शिकारी पक्षी से बचता हॉर्नबिल और कानों से छुपता हाथी जैसी मजेदार तस्वीरें भी शामिल थीं। इससे पहले दिसंबर में 2025 कॉमेडी वाइल्डलाइफ अवॉर्ड्स का मुख्य पुरस्कार ब्रिटिश फोटोग्राफर मार्क मेथ-कोहन ने नाचते हुए गोरिल्ला की तस्वीर के लिए जीता था। प्रथम विश्व युद्ध में अमेरिका के सबसे बड़े नौसैनिक नुकसान का मलबा मिला प्रथम विश्व युद्ध के दौरान डूबे अमेरिकी जहाज ‘यूएस कोस्ट गार्ड कटर टैम्पा’ का मलबा 107 साल बाद मिल गया है। यह जहाज 1918 में एक जर्मन पनडुब्बी के हमले में डूब गया था, जिसमें 131 लोगों की मौत हुई थी। सितंबर 1918 में जर्मन पनडुब्बी UB-41 ने इंग्लैंड के तट के पास इस जहाज पर टॉरपीडो दागा। हमले के महज तीन मिनट के भीतर ‘टैम्पा’ अटलांटिक महासागर में डूब गया था। इस हादसे में 111 कोस्ट गार्ड कर्मी, 4 अमेरिकी नौसेना के जवान और 16 ब्रिटिश नागरिकों समेत कुल 131 लोगों की मौत हुई थी। यह अमेरिका के लिए प्रथम विश्व युद्ध का सबसे बड़ा नौसैनिक नुकसान माना जाता है। ब्रिटेन की गैस्पेराडोस डाइव टीम 2023 से इस जहाज की तलाश कर रही थी। कई अभियानों के बाद टीम ने आखिरकार कॉर्नवाल तट से करीब 50 मील दूर, 300 फीट गहराई में मलबा खोज निकाला। यूएस कोस्ट गार्ड ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड, जहाज के हिस्सों की तस्वीरें और अन्य डेटा देकर मलबे की पहचान की पुष्टि की। हमले के बाद संभवतः कोयले की धूल या जहाज में मौजूद डेप्थ चार्ज के कारण दूसरा विस्फोट हुआ था। अगले दिन खोजी विमान को मलबे के टुकड़े मिले थे, लेकिन जहाज का पूरा ढांचा अब जाकर मिला है। कोस्ट गार्ड के कमांडेंट एडमिरल केविन लुंडे ने कहा कि इस खोज से शहीदों के बलिदान से जुड़ाव मजबूत होता है और उनके अंतिम विश्राम स्थल का पता चल गया है। अमेरिकी कोस्ट गार्ड अब रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस सिस्टम की मदद से मलबे का और गहराई से अध्ययन करने की योजना बना रहा है।
