अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ढहने की कगार पर पहुंच चुका है और जल्द से जल्द होर्मुज स्ट्रेट खुलवाना चाहता है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान ने अमेरिका को बताया है कि वह ‘स्टेट ऑफ कोलैप्स’ यानी बुरी स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान जल्द से जल्द होर्मुज स्ट्रेट खुलवाना चाहता है, ताकि समुद्री आवाजाही सामान्य हो सके। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान इस समय अपनी नेतृत्व स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने लिखा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान इससे बाहर निकल जाएगा। वहीं दूसरी तरफ ईरान के कहा है कि वह ट्रम्प का दबाव नहीं सहेगा। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलाएई-निक ने कहा कि अमेरिका अब उस स्थिति में नहीं है कि दूसरे देशों को बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए। साथ ही अमेरिका को अपनी गलत मांगें छोड़नी होंगी। अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन संघर्ष खत्म करने की बातचीत अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई गुजरती है, इसलिए इस रास्ते पर तनाव का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। इस बीच ईरान पहली बार होर्मुज खोलने को तैयार हो गया है। ईरान ने अमेरिका से समुद्री नाकेबंदी हटाने की भी अपील की है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अमेरिका को बातचीत के लिए रविवार को एक नया प्रस्ताव दिया था। इसमें मुख्य रूप से 3 शर्तें थीं- 1. अमेरिका-इजराइल के साथ चल रहा युद्ध खत्म हो और आगे हमला न करने की गारंटी मिले 2. फिर अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी हटे, होर्मुज खुले और जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो 3. सबसे आखिर में परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे विवादित मुद्दों पर बात हो हालांकि ट्रम्प इस प्रस्ताव को मानने को तैयार नहीं हैं। CNN के मुताबिक ट्रम्प सरकार का मानना है कि अगर बिना परमाणु कार्यक्रम का मामला सुलझाए बिना होर्मुज खोला, तो बातचीत में अमेरिकी पक्ष कमजोर हो जाएगा। इसलिए दोनों का हल एक साथ ही निकाला जाना चाहिए। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फंसा पेंच ट्रम्प ने दो दिन में दूसरी बार ईरान का प्रस्ताव ठुकराया है। दरअसल, पिछले कई हफ्तों से ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के जरिए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है। अमेरिका की मांग थी कि ईरान 20 साल तक अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दे और अपने पास मौजूद 440 किलो समृद्ध यूरेनियम सौंप दे। ईरान ने इन मांगों को बहुत ज्यादा और अनुचित बताते हुए मानने से इनकार कर दिया था। ईरान का पहला प्रस्ताव (जो खारिज हुआ) ईरान ने 26 अप्रैल को यह प्रस्ताव दिया था, जिसे ट्रम्प ने ठुकरा दिया था। इसके बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए कहा कि अभी कठिन मुद्दों को अलग रखा जाए। पहले युद्ध खत्म करने से जुड़े कदम उठाए जाएं, जैसे होर्मुज को खोलना और नाकेबंदी हटाना, और बाद में परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर बातचीत की जाए, जिसे 27 अप्रैल को एक बार फिर से ट्रम्प ने ठुकरा दिया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… आगे बढ़ने से पहले इस पोल के जरिए अपनी राय दीजिए… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
