सीएम भजनलाल शर्मा का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट रहा। उन्होंने जिन 6 सीटों पर सभाएं और रोड शो किए, उन सभी पर बीजेपी को जीत मिली। इस जीत में प्रवासी राजस्थानियों ने भी अहम भूमिका निभाई है। सीएम भजनलाल शर्मा ने सिलीगुड़ी, भवानीपुर, बाली, हावड़ा उत्त्र, बारानगर, बैरकपुर सीटों पर सभाएं और प्रचार किया। केरल में राजीव चंद्रशेखर के नामांकन में पहुंचे थे सीएम सीएम भजनलाल शर्मा केरल बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के नामांकन में पहुंचे थे और वहां उनके लिए प्रचार किया था। राजीव चंद्रशेखर ने केरल की नेमोम विधानसभा सीट से सीपीएम उम्मीदवार वी सिवनकुट्टी को हराया है। राजस्थान के नेताओं को बंगाल चुनावों में दी गई थी बड़ी जिम्मेदारी बंगाल में बीजेपी की जीत की रणनीति को धरातल तक उतारने के लिए राजस्थान के नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, सुनील बंसल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी और छह विधायकों सहित करीब 50 नेताओं ने बंगाल चुनावों में काम किया था। भूपेंद्र यादव ने प्रभारी के तौर पर जीत की रणनीति को धरातल तक उतारने में माइक्रो प्लानिंग की। सुनील बंसल को संगठन के साथ चुनावी रणनीति का लंबा अनुभव है। बंगाल में भी चुनाव अभियान से लेकर धरातल तक पूरी रणनीति बनाने में साथ रहे। हाईकमान से लेकर ग्राउंड वर्कर तक संपर्क में रहे। बंसल यूपी में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। भवानीपुर में कई महीने तक डटे रहे राजेंद्र राठौड़ ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं, ममता को उनकी ही सीट पर हराने के लिए बीजेपी ने लंबी तैयारी की। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के पास भवानीपुर में चुनाव मैनेजमेंट की जिम्मेदारी थी। भवानीपुर से ममता बनर्जी को हराने में उनकी रणनीति महत्वपूर्ण थी। वोटर्स तक पहुंचने से लेकर बूथ तक लाने तक की रणनीति तैयार राजेंद्र राठौड़ ने वोटर्स तक पहुंचने से लेकर बूथ तक लाने तक की रणनीति तैयार कर स्थानीय नेताओं-कार्यकर्ताओं से समन्वय किया। राजेंद्र राठौड़ को चुनाव लड़ने का लंबा अनुभव है। फंसे हुए चुनावों में गेम बदलने के राठौड़ के अनुभव का भवानीपुर में इस्तेमाल किया गया। बीजेपी की जीत में प्रवासी राजस्थानियों का भी बड़ा रोल बंगाल में प्रवासी राजस्थानी बड़ा समुदाय है। बंगाल के उद्योग व्यापार में आजादी के पहले से राजस्थानियों का दबदबा है। प्रवासी राजस्थानियों को एकजुट करने और उन्हें इन चुनावों में सक्रिय रूप से लगाने के लिए राजस्थान के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई। इस बार प्रवासी राजस्थानियों ने सबसे ज्यादा सक्रियता दिखाई। बंगाल के प्रमुख शहरों में प्रवासियों ने डोर टू डोर किया प्रचार कोलकाता, सिलीगुड़ी, हावड़ा से लेकर बंगाल के प्रमुख शहरों में प्रवासी राजस्थानियों ने इस बार खूब प्रचार किया। डोर टू डोर प्रचार में प्रवासी राजस्थानियों को लगाया था। प्रवासी राजस्थानियों की अलग से सभाएं की गई थी। राजस्थान के 50 नेताओं को प्रवासी राजस्थानियों को साधने में लगाया गया था। बंगाल चुनावों में होने वाली हिंसा के कारण जो प्रवासी न्यूट्रल रहते थे इस बार उन्हें राजस्थानी नेताओं ने सुरक्षा का एहसास करवाया और इसका ग्राउंड पर अच्छा असर हुआ।
