जल जीवन मिशन 1.0 में हुए घोटालों के बाद अब जेजेएम-2.0 में पैसा सख्त शर्तों पर मिलेगा। केंद्र ने राजस्थान को 4503 करोड़ का बजट दिया है, लेकिन इसे खर्च करने से पहले राज्य को हर स्कीम का पूरा हिसाब देना होगा। प्रदेश की सभी 13 हजार स्कीम और प्रोजेक्ट की अलग आईडी बनेगी। उसमें वर्कऑर्डर, अब तक का काम, भुगतान और बकाया काम का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। इस पर एआई से नजर रखी जाएगी। राज्य को पहले जेजेएम खाते में अपना 55% हिस्सा जमा करना होगा। इसके बाद ही केंद्र अपना 45% हिस्सा जारी करेगा। जलदाय विभाग जेजेएम का फाइनेंशियल रिकॉन्सिलिएशन कर रहा है। दो साल बाद केंद्र से बजट मिलने से प्रदेश के 44 लाख घरों में नल कनेक्शन की उम्मीद बढ़ी है। फंड जारी, लेकिन शर्तें सख्त
विभाग को सभी 13 हजार स्कीमों की नई आईडी बनानी होगी। हर स्कीम में भुगतान से पहले राज्य को 55% राशि संबंधित आईडी में डालनी होगी। इसके बाद केंद्र अपना 45% हिस्सा जारी करेगा। विभाग को केंद्र के 45% हिस्से का लेखा-जोखा नेशनल जेजेएम को देना होगा। तय हिस्से से ज्यादा खर्च हुआ तो स्कीमों का पैसा रोक दिया जाएगा। समय पर काम पूरा होने पर ही पेमेंट मिलेगा। देरी पर ठेकेदार पर सख्त पेनल्टी लगेगी। देरी की स्थिति में प्राइज वेरिएशन भी जलदाय विभाग भुगतेगा। जेजेएम घोटालों पर ईडी, CBI और एसीबी की नजर
जेजेएम टेंडरों और प्रोजेक्ट में अनियमितताओं व घोटालों को लेकर ईडी, सीबीआई और एसीबी जांच कर चुकी हैं। जेजेएम टेंडरों में फर्जी प्रमाण पत्र और पुलिंग के जरिए कई फर्मों को वर्कऑर्डर दिए गए। बिना काम पेमेंट का खेल भी हुआ। भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों के बाद 50 से ज्यादा इंजीनियरों पर सस्पेंड और एपीओ की कार्यवाही हुई। 110 से ज्यादा इंजीनियरों को चार्जशीट दी गई है। जेजेएम में मैसर्स श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी, शाहपुरा और मैसर्स श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी को फर्जी प्रमाण पत्रों से दिए टेंडर और गलत पेमेंट के 979 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच चल रही है। एमओयू के ढाई महीने बाद राशि जारी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जेजेएम की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। जल जीवन मिशन 2.0 की नई गाइडलाइन्स के अनुसार राजस्थान ने 17 मार्च को जल शक्ति मंत्रालय से एमओयू किया था। एमओयू के ढाई महीने बाद राशि जारी हुई है। नल कनेक्शन में ये पांच जिले सबसे फिसड्डी बाड़मेर में 21.32%, डीग में 28.73%, चित्तौड़गढ़ में 28.94%, डूंगरपुर में 32.39% और प्रतापगढ़ में 35.41% घरों में ही नल कनेक्शन हो सके हैं। पहले फर्जीवाड़ा हुआ, फिर जांच रोकने का दबाव
जलदाय विभाग के ठेकेदारों ने कई प्रोजेक्ट और स्कीमों में जमकर फर्जीवाड़ा किया। सरकार ने एसीबी, क्वालिटी कंट्रोल विंग और विजिलेंस विंग से जांच शुरू करवाई तो कई ठेकेदारों ने दबाव बनाने के लिए फील्ड में काम बंद कर दिया। जिन प्रोजेक्ट की जांच चल रही थी, उनका पेमेंट कराने के लिए पेयजल सप्लाई बंद करने का प्रयास भी किया गया। बजट की कमी से काम ठप पड़े थे। दो साल से कोई प्रोग्रेस नहीं आई। अब तक केवल 63 लाख यानी करीब 58% घरों में ही नल कनेक्शन है।
