जयपुर की पहचान उसकी हवेलियों, किलों और महलों से है। इन्हीं में से एक है अल्बर्ट हॉल। दैनिक भास्कर की एक पहल ने शहर की ऐतिहासिक धरोहर अल्बर्ट हॉल को हर शाम रोशनी के उत्सव में बदल दिया है। साल 2018 में दैनिक भास्कर ने इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद से हर रात अल्बर्ट हॉल रंग-बिरंगी एलईडी लाइट्स की चमक उठता है। इस बार दैनिक भास्कर की ओर से म्यूजियम डे (18 मई) पर विशेष लाइट शो भी रखा गया है। इसमें अलग-अलग थीम पर लाइटिंग की जाएगी। हर शाम सजता है रोशनी का उत्सव दैनिक भास्कर की ओर से अल्बर्ट हॉल पर आधुनिक एलईडी लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है। करीब 300 एलईडी लाइट्स और सात रंगों के 200 से अधिक शेड्स हर पल बदलते हुए अल्बर्ट हॉल को अलग-अलग रंगों में रंग देते हैं। शाम 6:30 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाला यह लाइट शो पर्यटकों और शहरवासियों के लिए किसी विजुअल ट्रीट से कम नहीं होता। जब लाइटें अल्बर्ट हॉल की नक्काशीदार मेहराबों, गुम्बदों और जालियों पर पड़ती हैं तो इसकी वास्तुकला और भी जीवंत नजर आने लगती है। रात के समय यहां आने वाले पर्यटक अक्सर इस खूबसूरत नजारे को अपने कैमरों और मोबाइल में कैद करते दिखाई देते हैं। आगे देखें अल्बर्ट हॉल की तस्वीरें… अल्बर्ट हॉल घूमने पहुंचे पीडियाट्रिशियन मोतीलाल सोनी ने कहा- हम इस बात पर गर्व करते हैं कि हम राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं। ऐसी ऐतिहासिक इमारतें हमारे शहर का हिस्सा है। दिन में इसका अलग सौन्दर्य है। रात को इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है। दैनिक भास्कर का इसके लिए धन्यवाद देते हैं, क्योंकि इनके प्रयास से ही रात को हम इसे अलग तरह से खूबसूरत अंदाज में देख सकते हैं। मैं परिवार के साथ रात को इसे देखने ही आया हूं। दीप्ति सिंह राणावत ने कहा- यहां अलग तरह का अनुभव मिलता है, अलग- अलग लाइटिंग के साथ अल्बर्ट हॉल की खूबसूरती बढ़ जाती है। दिन में इसकी अलग पहचान है, जैसे ही रात होने लगती है, इसकी खूबसूरती बढ़ने लग जाती है। यह ऐतिहासिक महत्व वाली जगह है। इसे ओर खास बनाने के लिए दैनिक भास्कर का धन्यवाद। पूजा देवी ने कहा- दैनिक भास्कर की वजह से हम अल्बर्ट हॉल की खूबसूरती को रात में देख पाते हैं। अल्बर्ट हॉल नाइट टूरिज्म की लाइफ है। रात 10 बजे तक यहां पर लोग आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, वीडियो बनाते हैं। यह सभी के लिए खास है। ताजमहल के बाद उत्तर भारत की सबसे खूबसूरत इमारत टूरिज्म विशेषज्ञों के अनुसार, अल्बर्ट हॉल उत्तर भारत की सबसे खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों में से एक माना जाता है। इसे ताजमहल के बाद नॉर्थ इंडिया का सबसे शानदार आर्किटेक्चरल स्मारक कहा जाता है। अल्बर्ट हॉल की सबसे बड़ी खासियत इसकी वास्तुकला है। इसमें भारतीय, मुगल और यूरोपियन स्थापत्य शैलियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। वास्तुकला में शामिल शैलियां (यही कारण है कि अल्बर्ट हॉल दिन में जितना भव्य दिखाई देता है, रात की रोशनी में उसकी खूबसूरती और कई गुना बढ़ जाती है।) 11 साल में बनकर तैयार हुआ था अल्बर्ट हॉल अल्बर्ट हॉल का इतिहास भी बेहद दिलचस्प है। साल 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स अल्बर्ट सेवेन के जयपुर आने के दौरान इसकी नींव रखी गई थी। इसको बनाने में लगभग 11 साल लगे और साल 1887 में यह ऐतिहासिक इमारत बनकर तैयार हुई। आज यह केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि जयपुर की सांस्कृतिक विरासत, कला और इतिहास का प्रतीक बन चुका है। इसमें छिपा है इतिहास का अनमोल खजाना अल्बर्ट हॉल की बाहरी खूबसूरती जितनी आकर्षक है, उसके भीतर मौजूद ऐतिहासिक धरोहरें भी उतनी ही अद्भुत हैं। यहां मिस्र की 322 ईसा पूर्व की ममी, 1632 का पर्शियन कार्पेट और उत्तर गुप्तकाल की लगभग 1500 वर्ष पुरानी यक्ष प्रतिमा प्रमुख आकर्षण हैं। इसके अलावा यहां पुरातन हथियार, सिक्के, मिनिएचर पेंटिंग्स और दुर्लभ कलाकृतियों का विशाल संग्रह मौजूद है, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं।
