गरीब, बीमार और असहाय। कोई किडनी की बीमारी से जूझ रहा है, कोई शराब की लत में मौत की कगार पर है। जब इनकी मौत होती है, तो सामने आते हैं 50 लाख, 80 लाख और करोड़ों तक के बीमा क्लेम। गुजरात और राजस्थान में बीमा एजेंटों का गिरोह काम कर रहा है। ये ऐसे ही लोगों को ढूंढते हैं। बीमा खुद करते हैं। बाद में सामान्य मौत को हादसा बताकर दुर्घटना क्लेम उठा लेते हैं। अहमदाबाद (गुजरात) से मरणासन्न स्थिति में दीपक को भीलवाड़ा लाया गया। यहां सामान्य मौत के बाद उसके हाथ-पैरों की उंगलियां जला दी गईं, ताकि दुर्घटना दिखे। फर्जी एफआईआर, गवाहों और फर्जी गाड़ियों की साठगांठ से फर्जी क्लेम उठ रहे हैं। राजस्थान और गुजरात में ये फर्जी बीमा क्लेम गिरोह सक्रिय है। वे ऐसे ही लोगों को फांसकर बीमा करके फर्जी तरीके से क्लेम उठा रहे हैं। भास्कर टीम अहमदाबाद पहुंची। यहां 15 कच्ची बस्ती एरिया में 71 लोगों के फर्जी बीमे मिले। दीपक के नाम डेढ़ करोड़ की 6 पॉलिसी है। उसका घर ऐसा है कि बमुश्किल दो वक्त का खाना मिलता है। फर्जी बीमा एजेंट ऐसे ही नशेड़ियों और असहायों को टारगेट कर बीमा कर रहे हैं। उनकी किस्तें भी खुद भरते हैं और बीमा उठा लेते हैं। पढ़िए यह रिपोर्ट… दीपक के नाम 1.56 करोड़ की 6 पॉलिसी गुजरात में असहाय और गरीबों के फर्जी बीमे
भास्कर टीम अहमदाबाद में दीपक के गांव नरोड़ा पहुंची। 3 दिन तक गांधीनगर, मणिनगर, नरोड़ा, कुबेरनगर, कलोल, जुना वाडेज, साबरमती सहित करीब 15 एरिया में जानकारी जुटाई। यह कच्ची बस्ती वाले घर हैं। जिन घरों में दवा और राशन के पैसे नहीं, उनके भी 25 लाख से डेढ़ करोड़ तक का बीमा है। शराब की लत के लिए भी पैसे देते थे एजेंट अहमदाबाद के नराेडा क्षेत्र में रहने वाले 36 वर्षीय दीपक गाेहेल के घर में बूढ़ी मां और 11 साल का बेटा दिव्यांश है। कमाने वाला काेई नहीं है। पत्नी की 4 साल पहले मौत हो चुकी है। दीपक शराब पीने का आदी था। इसी का फायदा उठाकर डेढ़ करोड़ के 6 बीमें कर दिए। मरणासन्न स्थिति में दीपक काे भीलवाड़ा ले आए। माैत होने पर इसके पैर व हाथ की अंगुलियां जला दी ताकि करंट जैसा लगे। शराब की लत के लिए हर माह पैसे देते थे। पुलिस को बताया जिंदा, मां बोली- बेटा मर गया साबरमती एरिया में पावर हाउस के पास भावेश भाई पुत्र कानूभाई रहते हैं। इसका सूरज ने ही नाॅन एक्सीडेंटल बीमा किया था। इसकी 4 पाॅलिसी 35 लाख की है। पुलिस काे बताया कि भावेश जिंदा है। घर पहुंचे ताे मां शारदाबेन ने बताया कि रात काे साेया और सुबह उठा ही नहीं। शराब बहुत पीता था। कुछ लाेगाें ने बीमे भी किए लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला। भावेशके दाे बेटियां व एक बेटा है। मां दूसराें के घराें में झाडू-पाेछा करती है। बीमार लक्ष्मण बिस्तर से उठ नहीं पाता, 25 लाख का बीमा जुना वाड़ेज में 44 वर्षीय लक्ष्मण कुमार के घर पहुंचे। वे बीमार हैं और ज्यादा चलते-फिरते नहीं है। इसका भी इस गैंग ने फिट बताकर करीब 25 लाख का बीमा कर दिया। यह भी ऐसी जगह रहता है, जहां न घराें पर छत है और केवल कच्ची झाेंपड़ियां ही हैं। यहां के लाेग केवल दिहाड़ी करते हैं। बीमा एजेंट के पास लक्ष्मण के ITR, पैन कार्ड सहित नाॅन एक्सीडेंटल बीमा के दस्तावेज भी मिले हैं। बीमा 40 लाख रुपए का कलाेल एरिया का करण जस्सू भाई 32 साल का है। यहां चालियाें में पूछने पर पहले ताे बताया कि इस नाम का यहां काेई नहीं रहता है। बाद में किसी ने बताया कि यह करण का घर है। देखा ताे वहां केवल चद्दर के पाटिये लगा रखे है। शराब खूब पीता है इसलिए पत्नी छाेड़कर चली गई। माता-पिता की माैत हाे गई। अब घर में अकेला है इसलिए महीने में कभी-कभार आता है। इसका भी करीब 40 लाख का नॉन एक्सीडेंटल बीमा कर रखा है। बीमा एजेंट के पास दस्तावेज मिले हैं। अहमदाबाद के बीमा एजेंट सूरज का राजस्थान के कई जिलों में नेटवर्क बीमा एजेंट अहमदाबाद का सूरज विश्वास है। सूरज सात-आठ बार राजस्थान आ चुका है। सूरज के भीलवाड़ा के राकेश की तरह चित्तौड़गढ़, राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर व उदयपुर में भी कई कनेक्शन हैं। अहमदाबाद में कई एजेंट हैं, जो शराब या अन्य लालच देकर बीमा करते हैं। भावेश की मां ने बताया कि उसके बेटे के पास मुकेश आता था। वहीं दीपक के बेटे ने भी चार दूसरे लोगों के नाम बताए। सूरज ने भीलवाड़ा और अहमदाबाद के 6 लोगों की 36 पॉलिसी की। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के बाहर भी गिरोह का नेटवर्क है। गेट नंबर तीन की ओपीडी के बाहर सिक्योरिटी गार्ड से बीमा करने के लिए पूछा। किसी को फोन कर बुलाया। उसने कहा, हम रोज बीमा करते हैं। मरीज कहीं का भी हो। राजस्थान तो क्या, एमपी, महाराष्ट्र तक हमारे आदमी हैं जो बीमा करके क्लेम दिलाते है। राजस्थान- दुर्घटना बीमा में 5 लाख मिलते है, इसलिए यहां लाकर मौत दिखा रहे अहमदाबाद के साबरमती में भावेशभाई के घर गए, तो चाली के बाहर एक दुकानदार मिला। उसने कहा, ये लोग शराब पीते हैं। इसलिए इनके बीमे कर क्लेम उठाते हैं। राजस्थान में दुर्घटना बीमा के अलग से पांच लाख रुपए मिलते हैं। इसलिए इन लोगों को वहां खेत का सिजारा (बंटाई) बताकर करंट या कुएं में गिरना बताते हैं। भीलवाड़ा के मांडल में जो दीपक का मामला पकड़ा, उसमें खेत पर करंट बताने की योजना ही थी। पोस्टमॉर्टम कहां होगा, यह भी पहले से तय था। एक डॉक्टर ने मामला पकड़कर पुलिस को बुला लिया। इसके बाद इसका कनेक्शन गुजरात से निकला।
