कोटा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने 67 साल की बुजुर्ग महिला के लीडलेस पेसमेकर लगाया है। पेसमेकर लगाने के प्रोसीजर में एक घंटा लगा। प्रोसीजर के तहत सीने में बिना चीरा लगाए दूरबीन की मदद से करीब 2 ग्राम वजनी और 38 मिलीमीटर लम्बा (पेंसिलनुमा) पेसमेकर दिल में लगाया गया। इस तकनीक में संक्रमण का खतरा बहुत कम होता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भंवर रनवां के नेतृत्व में डॉ संदीप सेठी, डॉ.यशवंत शर्मा, कैथ लैब इंचार्ज मदन मोहन गुप्ता, टेक्नीशियन/स्टॉफ दीपक, गोविंद राठौड़, महेंद्र शर्मा, सुनील बैस टीम में शामिल रहे। पेसमेकर लगाने के बाद महिला स्वस्थ है। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को दूसरे ही दिन चलने-फिरने की परमिशन देकर डिस्चार्ज कर दिया गया। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ भंवर रणवां ने बताया कि ब्यावर निवासी शांति गर्ग (67) के 10 साल में तीसरा पेसमेकर लगा है। RGHS योजना के तहत सरकार से विशेष अनुमति लेकर निःशुल्क इलाज किया गया। जबकि प्राइवेट हॉस्पिटल में इस प्रोसीजर में करीब 12 से 15 लाख रूपए का खर्च आता है डॉ भंवर रणवां ने बताया कि मरीज का लगभग दो महीने पहले जयपुर में पारंपरिक पेसमेकर लगाया गया था। लेकिन उसमें गंभीर संक्रमण हो गया। एक महीने पहले उसे निकालना पड़ा, और अस्थाई पेसमेकर लगाना पड़ा। संक्रमण इतना बढ़ गया था कि लगातार मवाद आ रही थी, और प्लास्टिक सर्जरी व एंटीबायोटिक इलाज से भी सुधार नहीं हो रहा था। इस कारण फिर से पारंपरिक पेसमेकर लगाना संभव नहीं था। पिछले एक महीने से महिला बिस्तर पर थी। चमड़ी के बाहर बैटरी लगी हुई थी। महिला का उठना-बैठना, चलना-फिरना बंद था और दैनिक क्रियाएं भी बिस्तर पर ही करनी पड़ रही थीं। जयपुर और अजमेर में भी आगे पेसमेकर लगाने से मना कर दिया गया था। महिला 18 अप्रैल कोटा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एडमिट हुई थी। 30 अप्रैल को ऑपरेशन कर महिला के लीडलेस पेसमेकर लगाया गया। इससे पहले साल 2016 में ट्रेडिशनल पारंपरिक पेसमेकर लग चुका था। जिसकी मियाद साल 2025 में खत्म हो चुकी थी । क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक? यह उन मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है। जिनके पारंपरिक पेसमेकर में बार-बार संक्रमण हो रहा हो या जिन्हें सामान्य पेसमेकर लगाना संभव न हो। पारंपरिक पेसमेकर व लीडलेस पेसमेकर में अंतर पारंपरिक पेसमेकर में बैटरी और तार स्किन के नीचे लगाए जाते हैं, जिससे संक्रमण या मशीन खराब होने का खतरा रहता है। पारंपरिक पेसमेकर का वजन 250 से 400 ग्राम के बीच होता है, और लम्बाई 6-8 सेंटीमीटर होती है। यह सस्ता पड़ता है। इस प्रोसीजर में डेढ़ लाख तक का खर्च आता है। वहीं लीडलेस पेसमेकर में बैटरीनुमा छोटा उपकरण ( 2 ग्राम व 38 मिलीमीटर लम्बा ) होता है। सीधे हृदय की मांसपेशियों में लगाया जाता है। जिससे चीरे, तार और बाहरी बैटरी की जरूरत नहीं रहती। इससे संक्रमण और खराबी का जोखिम लगभग खत्म हो जाता है। ये महंगा पड़ता है। प्राइवेट हॉस्पिटल में इसका खर्चा 10-12 लाख के करीब आता है। पेसमेकर क्या है? जब हृदय की धड़कन बहुत धीमी हो जाती है, तो मरीज को चक्कर, कमजोरी या बेहोशी आने लगती है। पेसमेकर हृदय की धड़कन को नियंत्रित कर सामान्य स्थिति में लाने का कार्य करता है। हार्ट ब्लॉक क्या है?
यह हार्ट अटैक से अलग बीमारी है। जिसमें हृदय की गति धीमी हो जाती है। धड़कन 40 प्रति मिनट से कम होने पर बार-बार बेहोशी या मूर्छा की स्थिति बन सकती है।
