रणथंभौर नेशनल पार्क की सीमा से सटे कैलाशपुरी, मौजीपुरा और दुमोदा गांव के बीच पिछले कई दिनों से चीता केपी-2 का मूवमेंट बना हुआ है। यह चीता अमरूद के खेत में डेरा डाले हुए है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है। स्कूली बच्चे और किसान ज्यादा प्रभावित हैं। हालांकि अब तक किसी पर हमले की घटना सामने नहीं आई है। वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अमरूद के खेत में डेरा, गांवों के बीच मूवमेंट जानकारी के अनुसार चीता केपी-2 पिछले कई दिनों से कैलाशपुरी, मौजीपुरा और दुमोदा गांव के आसपास घूम रहा है। उसे एक अमरूद के खेत में देखा गया है, जहां वह फिलहाल रुका हुआ है। इससे आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ गई है। बच्चे और किसान ज्यादा प्रभावित चीते की मौजूदगी के कारण गांव में डर का माहौल है। स्कूली बच्चे स्कूल जाने और लौटने में डर महसूस कर रहे हैं। वहीं किसान भी अपने खेतों में जाने से हिचकिचा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे सावधानी बरत रहे हैं, लेकिन चिंता बनी हुई है। वन विभाग की टीम कर रही निगरानी रेंजर विजय मीणा के अनुसार वन विभाग की टीम लगातार मौके पर नजर रख रही है। चीते की गतिविधियों को मॉनिटर किया जा रहा है और गश्त भी जारी है। विभाग ने लोगों को बताया है कि फिलहाल चीता शांत है और आक्रामक नहीं है। अब तक किसी पर हमला नहीं, सतर्क रहने की सलाह वन विभाग के अनुसार अब तक चीते ने किसी भी ग्रामीण पर हमला नहीं किया है। इसके बावजूद लोगों को अकेले खेतों या सुनसान जगहों पर न जाने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जंगल में वापस भेजने के प्रयास अधिकारियों के अनुसार चीते को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें।
