जैसलमेर और आसपास के रेल खंडों पर टिकटों की कालाबाजारी करने वाले दलालों के खिलाफ RPF ने 2025-26 में विशेष अभियान चलाकर 66 दलालों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान 4 लाख 3 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया और 250 संदिग्ध यूजर आईडी ब्लॉक की गईं। रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत 63 केस दर्ज किए गए हैं। कार्रवाई जैसलमेर, जोधपुर, भगत की कोठी, मेड़ता रोड और समदड़ी स्टेशनों पर की गई। अलग-अलग टीम बनाकर छापेमारी आरपीएफ ने वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (सुरक्षा) नीतीश कुमार शर्मा के अनुसार, ये अभियान मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के निर्देशों पर चलाया गया। टीमों ने अलग-अलग ग्रुप बनाकर प्रमुख स्टेशनों के पीआरएस काउंटरों पर नजर रखी और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की। सॉफ्टवेयर और फर्जी आईडी से ई टिकट बनाने वाले 47 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया और 4 लाख 3 हजार का जुर्माना भी वसूला। काउंटर के पास 16 दलाल रंगे हाथ पकड़े जांच के दौरान काउंटरों के आसपास यात्रियों को बहलाने वाले 16 लोगों को मौके पर ही पकड़ा गया। ये लोग टिकट दिलाने के नाम पर ज्यादा पैसे वसूल रहे थे। जैसलमेर और अन्य स्टेशनों पर रंगे हाथों पकड़े गए दलाल रेलवे की इस स्ट्राइक का सबसे ज्यादा असर जैसलमेर और जोधपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर देखा गया। सीनियर सिक्योरिटी कमिश्नर ने बताया कि आरपीएफ की टीमों ने अलग-अलग ग्रुप बनाकर छापेमारी की। इस दौरान जैसलमेर, जोधपुर, भगत की कोठी, मेड़ता रोड और समदड़ी स्टेशन के पीआरएस (टिकट काउंटर) पर नजर रखी गई। काउंटरों के पास घूमकर यात्रियों को बहलाने-फुसलाने वाले 16 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। वहीं, सॉफ्टवेयर और फर्जी आईडी के जरिए ई-टिकट का काला कारोबार करने वाले 47 अन्य लोगों को भी पकड़ा गया। इस पूरी कार्रवाई में रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत कुल 63 केस दर्ज किए गए हैं। कई को मिली सजा आरपीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां कानून का डंडा चला। अब तक 49 मामलों का निपटारा हो चुका है, जिनमें 50 व्यक्तियों पर न्यायालय ने आर्थिक दंड लगाया है। वर्तमान में 3 मामलों में 4 आरोपी ट्रायल (सुनवाई) पर हैं, जबकि 11 अन्य मामलों में 12 व्यक्तियों के खिलाफ जांच अभी भी जारी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इन पर भी कड़ी कार्रवाई तय है। क्या कहती है धारा 143 रेलवे कानून के जानकारों के मुताबिक, रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 143 दलाली के खिलाफ एक सख्त हथियार है। इसके तहत अगर कोई भी व्यक्ति बिना रेलवे की अनुमति (अनधिकृत) के टिकट खरीदता या बेचता है, तो वह अपराधी है। चाहे वह टिकट खिड़की से लिया गया हो या ऑनलाइन। यात्रियों से अपील: दलालों से रहें सावधान सीनियर डीसीएम हितेश यादव ने जैसलमेर आने वाले सैलानियों और स्थानीय यात्रियों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि ऑफिशियल चैनल का ही उपयोग करें। टिकट केवल रेलवे काउंटर या IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट/ऐप से ही बुक करें। कभी भी अपनी पर्सनल यूजर आईडी या पासवर्ड किसी अनजान एजेंट के साथ साझा न करें। ‘जल्दी कंफर्म टिकट’ या ‘शॉर्टकट’ के झांसे में आकर अपनी यात्रा को खतरे में न डालें। अवैध टिकट पर यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्री को भी परेशानी हो सकती है। अगर आपको जैसलमेर स्टेशन या कहीं भी टिकटों की कालाबाजारी की भनक लगे, तो तुरंत रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या नजदीकी स्टेशन मास्टर को सूचित करें। उन्होंने बताया – रेलवे का लक्ष्य है कि जैसलमेर आने वाले हर यात्री को पारदर्शी तरीके से और उचित सरकारी दर पर टिकट मिले, ताकि उनकी यात्रा सुखद और सुरक्षित रहे।
