14 अक्टूबर 2023 को रात करीब 2 बजे जयपुर कमिश्नरेट के मानसरोवर थाने में पिता नाबालिग बेटी के साथ दौड़ा-दौड़ा पहुंचा। पुलिस के सामने जोर-जोर से रोने लगा। ड्यूटी ऑफिसर ने उसे उठाया और रोने का कारण पूछा। पीड़ित रोते हुए बोला- साहब सब कुछ खत्म हो गया है। मेरी बेटी की इज्जत चली गई। पड़ोस में रहने वाले युवक ने मेरी मासूम बेटी के साथ दरिंदगी की। पुलिस टीम ने पिता की बात सुनी और सीनियर अधिकारियों को जानकारी दी।
सीआई मानसरोवर कुछ मिनटों में थाने पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने पीड़िता से घटना को लेकर जानकारी ली। इसके बाद पीड़िता के पिता की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई। 14 अक्टूबर की रात हुई घटना रिपोर्ट में बताया कि 14 अक्टूबर की रात करीब 1.30 बजे पत्नी की नींद खुली तो पास में लेटी हुई नाबालिग बेटी नहीं मिली। कुछ देर बेटी का इंतजार किया यह सोच कर कि शौच करने के लिए गई होगी। काफी देर तक बेटी नहीं आई तो मां खड़ी हुई। देखा गेट खुला हुआ है। मां सीढ़ियों से नंगे पैर छत पर पहुंची। वहां जो देखा उसे देख कर सहम गई। छत पर आरोपी नाबालिग बेटी के साथ गलत काम कर रहा था। पीड़िता की मां ने इस हरकत को देखा तो चिल्लाई। आरोपी युवक पीड़िता की मां को छत पर देख कर डर गया और पास की छत की तरफ भाग कर गायब हो गया। पीड़िता की मां नाबालिग बेटी को लेकर नीचे उतरी। कमरे में सो रहे पिता को घटना के बारे में बताया। 5 दिन पहले भी कर चुका था गंदी हरकत पिता ने बेटी से पूछा तो उसने बताया- आरोपी ने फेक इंस्टाग्राम आईडी से उसे फंसाया था। वह उसके साथ यह हरकत 5 दिन पहले भी कर चुका है। जब उसने इसका विरोध किया तो युवक ने माता-पिता को जान से मारने की धमकी दी। इससे वह डर गई। आरोपी ने इसी बात का फायदा उठाना शुरू कर दिया। बच्ची का दर्द सुन कर और पत्नी को रोता देख कर पीड़ित पिता खुद को नहीं रोक सका। उसने सबसे पहले अपने भाई को फोन लगाया और उसे घर पर बुलाया। एकाएक रात को आए फोन के कारण पीड़ित का भाई भी बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच गया। दोनों भाइयों ने पूरी घटना पर कुछ समय लेकर विचार किया। फिर पिता, बेटी को अपने साथ रात को ही लेकर मानसरोवर थाने पहुंच गया, जहां पर पुलिस को पूरा घटनाक्रम बताया और रिपोर्ट दी। गुमसुम रहने लगी मासूम इस घटना के बाद हमेशा हंसती-खेलती रहने वाली मासूम बिल्कुल गुमसुम रहने लगी। स्कूल जाने का भी मन नहीं करता। कुछ समय मां के साथ मिल कर काम करती, नहीं तो कमरे में जाकर सो जाती। माता-पिता दोनों उसकी परेशानी और डर समझ रहे थे। दोनों को जब भी समय मिलता उसे समझाने और उसका मन बहलाने का प्रयास करते ताकि वह उस दर्द से बाहर निकल सके। बच्ची घटना के बाद काफी दिनों तक परेशान रही। समय बीतता गया, पुलिस जांच होती रही। कुछ समय बाद बच्ची ने फिर से स्कूल जाना शुरू कर दिया। इधर, पुलिस आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाने में जुट गई। कल पढ़िए आगे की कहानी…
