25 जुलाई 2025 को झालावाड़ के सरकारी स्कूल की छत गिरने से वहां पढ़ रहे 7 स्टूडेंट्स की जान चली गई थी। उस समय खूब हो-हल्ला मचा था। बड़े-बड़े वादे किए गए थे। इस घटना के करीब 9 महीने बाद ही बांसवाड़ा में हादसा हो गया। घाटोल (बांसवाड़ा) ब्लॉक स्थित अमरथून के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में 4 मई को छत का प्लास्टर क्लास रूम में पढ़ रहीं 4 लड़कियों के ऊपर अचानक गिर गया। गनीमत रही कि प्लास्टर का भारी हिस्सा किसी के सिर पर नहीं गिरा। करीब दो साल पहले ही 10 लाख रुपए खर्च कर स्कूल का मरम्मत करवाया गया था। हादसे की 2 तस्वीरें… क्लास रूम में बैठी छात्राएं चपेट में आईं 11वीं साइंस के क्लासरूम में सोमवार सुबह करीब सवा नौ बजे स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे थे। तभी अचानक छत से प्लास्टर टूटकर नीचे आ गिरा। क्लास रूम में बैठीं 4 छात्राएं इसकी चपेट में आ गईं। मलबा टेबल-कुर्सियों पर बिखर गया। हादसे के दौरान तेज आवाज आई थी। इससे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई थी। बड़ी संख्या में गांव वाले भी आ गए थे। चडला निवासी पूजा, काली कुमारी, शारदा कुमारी और एक अन्य छात्रा घायल हुई हैं। इनको हॉस्पिटल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद लड़कियों को घर भेज दिया गया। छात्राओं को पीठ और हाथ सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। सूचना मिलते ही संस्था प्रधान अरुण व्यास ने तत्काल घायलों को हॉस्पिटल भिजवाया और उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी। पहले भी जर्जर भवन को लेकर दिए जा चुके थे ज्ञापन
ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन के अनुसार विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार ज्ञापन, प्रार्थना पत्र और सर्वे रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब तक मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत नहीं हुआ। हाल ही में हुआ था मरम्मत कार्य
बताया जा रहा है कि जिस कक्षा में हादसा हुआ, वहां हाल ही में मरम्मत कार्य कराया गया था। इसके बावजूद प्लास्टर गिरने की घटना हुई है। यह निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करता है। एसडीएम समेत कई अधिकारी पहुंचे, जांच के निर्देश
घटना की सूचना मिलते ही मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार रावल, सीबीईओ केशवचंद्र बामणिया, अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे। बाद में डीईओ जयदीप पुरोहित, एसडीएम मनसुख डामोर, तहसीलदार हाबुलाल, पटवारी और गिरदावर ने भी मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने विशेषज्ञों को बुलाकर भवन की जांच कराने, मरम्मत कार्य तेज करने, नए क्लास रूम और प्रयोगशालाओं के निर्माण के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। प्रधानाचार्य बोले- 13 में से 8 कमरे जर्जर प्रधानाचार्य अरुण व्यास ने कहा – स्कूल जर्जर स्थिति में है। इसको लेकर सीएम पोर्टल, शिक्षा मंत्री और शिक्षा अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया। 13 कमरों में से 8 जर्जर हालत में हैं। तीन कमरे अधिक जर्जर हैं। दो साल पहले 10.65 लाख के बजट से मरम्मत कार्य कराया गया था। हादसे की आशंका के चलते टिन शेड के नीचे छात्रों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। गर्मी अधिक होने के कारण मजबूरी में बच्चों को आंशिक रूप से जर्जर कमरों में बैठाया जा रहा था। राजस्थान के 502 स्कूल जर्जर, 212 बिल्डिंग बैठने लायक नहीं राजस्थान में 502 स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर है। इसमें से 212 स्कूलों के भवन इतने जर्जर हैं कि बच्चों के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं। इन स्कूलों के स्टूडेंट्स को अब अस्थायी रूप से पास के सुरक्षित स्कूलों में शिफ्ट किए जाने की योजना है। 290 स्कूलों में बच्चों को उसी स्कूल के दूसरे क्लासरूम में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया था। सबसे ज्यादा प्रतापगढ़ जिले में 26 स्कूलों भवन जर्जर हैं। इसके बाद बीकानेर 18, बालोतरा में 16 और झालावाड़ में 15 स्कूल भवन बिल्कुल खराब हालत में हैं। 34 जिलों में 290 जर्जर स्कूल भवनों को चिह्नित किया गया है। पूरी खबर पढ़ें ——— ये खबरें भी पढ़िए… 1- राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरी,7 बच्चों की मौत:9 की हालत गंभीर; 5 टीचर सस्पेंड राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई, वहीं 9 गंभीर घायल हो गए। मनोहरथाना ब्लॉक के पिपलोदी सरकारी स्कूल की क्लास में सुबह बच्चे बैठे थे, तभी कमरे की छत ढह गई। पढ़ें पूरी खबर… 2- राजस्थान स्कूल हादसा- टूटी छत, लटकते सरिये, दरकती दीवारें:350 साल पुराने जर्जर महल में भी पढ़ाई, नाम कटवाने पहुंचे पेरेंट्स राजस्थान के सरकारी स्कूलों को लेकर सरकारी दावे हवा-हवाई हैं। सड़ चुके सिस्टम की तरह प्रदेश के 2 हजार (अलग-अलग रिपोर्ट के दावे) से ज्यादा स्कूलों की बिल्डिंग या तो कभी भी गिर सकती हैं, या उनकी हालत काफी खराब है। पढ़ें पूरी खबर…
