उदयपुर सहित प्रदेशभर के सरकारी विभागों में गलत तरीके से वेतन ले रहे कर्मचारियों और गलत फिक्सेशन करने वाले अधिकारियों पर अब गाज गिरना तय है। वित्त विभाग और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के समस्त सेवारत राज्य कर्मचारियों के वेतन निर्धारण (पे-फिक्सेशन) की फिर से जांच के कड़े आदेश जारी किए हैं। उदयपुर जिले के शिक्षा विभाग में इसे लेकर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में तृतीय श्रेणी से लेकर द्वितीय श्रेणी के शिक्षकों के हाल ही पदोन्नति और एसीपी के मामले निस्तारित हुए हैं। सरकार ने दो टूक कहा है कि यदि भविष्य में नियम विरुद्ध भुगतान का कोई भी मामला सामने आता है तो जांच में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से न केवल उस राशि की वसूली की जाएगी, बल्कि उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। वरिष्ठतम लेखाधिकारी से सत्यापन अनिवार्य विभागीय परिपत्र के अनुसार सभी आहरण वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को अपने कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान, पदोन्नति, एसीपी और एमएसीपी के आधार पर किए गए वेतन निर्धारण की गहनता से पड़ताल करनी होगी। इस जांच को विभाग के वरिष्ठतम लेखाधिकारी से सत्यापित कराना अनिवार्य होगा। जुलाई-2026 के वेतन बिलों में डीडीओ को यह प्रमाण-पत्र देना होगा कि सभी कार्मिकों के वेतन की जांच कर ली गई है और इसमें कोई विसंगति नहीं है। बता दें कि प्रशासनिक दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2017 और 2025 में भी ऐसी जांच के आदेश दिए गए थे। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी और गलत वेतन निर्धारण के मामले थम नहीं रहे हैं। समीक्षा मांगी, हम काम शुरू कर चुके
“इससे यदि किसी ने जानबूझकर या गलती से गलत फिक्सेशन करवाया या किया है तो स्पष्ट हो जाएगा। सरकार ने विस्तृत समीक्षा मांगी है। हमने उदयपुर जिले में काम शुरू कर दिया है।”
-डॉ. लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), उदयपुर ऑडिट में सामने आ जाएंगी गड़बड़ियां
“वर्षभर में वेतन संबंधी जो भी शिकायतें आती हैं, उनमें यदि कोई बड़ी गड़बड़ी होगी तो इस विशेष ऑडिट में वह सामने आ जाएगी।”
-चंद्रशेखर जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक), उदयपुर
