राजस्थान में आर्थिक अपराध, टैक्स चोरी और काले धन के लेन-देन पर नकेल कसने के लिए सरकार मल्टी-डिपार्टमेंट स्ट्राइक सिस्टम तैयार कर रही है। कार्मिक विभाग ने राजस्व आसूचना एवं आर्थिक अपराध निदेशालय के लिए विशेष चयन प्रक्रिया और सेवा शर्तों की अधिसूचना जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत प्रशासन, पुलिस, कर, आबकारी, परिवहन, बैंकिंग और आईटी जैसे विभागों के अफसर एक साथ काम करेंगे। निदेशालय में नियुक्तियां प्रतिनियुक्ति के जरिए होंगी। अलग-अलग विभागों से चयनित अफसरों को यहां न्यूनतम 5 साल के लिए भेजा जाएगा। शुरुआती नियुक्ति 2 साल की होगी, जिसे आगे बढ़ाया जा सकेगा। निदेशालय में तैनात अफसर-कर्मचारियों को 7% स्पेशल भत्ता मिलेगा। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. मुकुट बिहारी जांगिड़ की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार चयन इंटरव्यू, सर्विस रिकॉर्ड और इंटेलिजेंस अनुभव के आधार पर होगा। इसके लिए हाई-लेवल चयन समिति बनाई गई है। इसमें वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी, संबंधित विभागों के सचिव और निदेशालय के महानिदेशक शामिल होंगे। 5 कैटेगरी के पद होंगे…
निदेशालय में सीनियर अफसरों से लेकर ग्राउंड स्टाफ तक 25 कैटेगरी के पद होंगे। इनमें अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक, राजस्व आसूचना अधिकारी, विधि, लेखा और आईटी विशेषज्ञ, तहसीलदार, कर अधिकारी, निरीक्षक, क्लेरिकल स्टाफ, ड्राइवर और चपरासी तक शामिल होंगे। यानी यह सिर्फ दफ्तर नहीं, बल्कि आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई के लिए पूरी ऑपरेशन मशीनरी होगी। इसलिए अहम है नया सिस्टम राजस्व चोरी पर प्रहार – टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग, अवैध खनन, शराब तस्करी और ट्रांसपोर्ट घोटालों की जांच अब अलग-अलग विभागों में नहीं बंटेगी। संयुक्त टीम काम करेगी, जिससे इन्फॉर्मेशन गैप घटेगा और बड़े नेटवर्क पकड़े जा सकेंगे। इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई – चयन में विजिलेंस, राजस्व संग्रह और लीकेज रोकने का अनुभव रखने वाले अफसरों को प्राथमिकता। कार्रवाई सिर्फ शिकायत पर नहीं, पुख्ता सूचना के आधार पर होगी।
स्पेशल टास्क फोर्स जैसा मॉडल – आईटी, अकाउंट्स, लॉ और फील्ड अफसर एक छत के नीचे रहेंगे। इससे हवाला, शेल कंपनियों और टैक्स चोरी के नेटवर्क को ट्रैक करना आसान होगा।
