बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर जयपुर के आध्यात्मिक साधक एवं लेखक रोहित शिवोहम की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘विरह: द आर्ट ऑफ लेटिंग गो’ का विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआ। पुस्तक का प्रथम अनावरण लेखक के गुरु योगी नंद किशोर ने पड़ासोली स्थित पावन धाम मंदिर में हुआ। रोहित ने बताया कि यह कृति ब्रजभूमि के पूज्य संतों के सान्निध्य में भी समर्पित की गई, जहां वृंदावन के रसिक संत प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज एवं सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज की उपस्थिति में पुस्तक का विशेष अनावरण हुआ। इसी क्रम में बरसाना स्थित लाड़ली जी मंदिर में पुस्तक को श्रीजी विग्रह के चरणों में अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इसके अतिरिक्त गोपेश्वर महादेव, बांके बिहारी मंदिर, राधा वल्लभ मंदिर और राधा रमण मंदिर में भी पुस्तक को ससम्मान अर्पित किया गया। पुस्तक ‘विरह: द आर्ट ऑफ लेटिंग गो’ की मूल प्रेरणा भगवान बुद्ध की धर्मपत्नी देवी यशोधरा के जीवन, उनके मौन त्याग, धैर्य और आंतरिक शक्ति से ली गई है। यह कृति विरह को केवल बिछोह की वेदना के रूप में नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति, आत्म-स्वीकृति और आंतरिक रूपांतरण के रूप में प्रस्तुत करती है। रोहित शिवोहम की पूर्ववर्ती चर्चित पुस्तक ‘तत्सुखे सुखित्वम्’ को पाठकों से चर्चा मिल चुकी है। विमोचन अवसर पर लेखक रोहित शिवोहम ने आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानसिक स्वास्थ्य के संकट पर गंभीर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के बावजूद भीतर से रिक्त, अस्थिर और तनावग्रस्त है। अनकहे भाव, अधूरी स्मृतियां, संबंधों का बोझ और ‘छोड़ न पाने’ की प्रवृत्ति आज मानसिक अशांति का बड़ा कारण बन चुकी है।
