उदयपुर में हिस्ट्रीशीटर के घर से लेपर्ड की खाल बरामद हुई है। जांच में पता लगा कि लेपर्ड की खाल करीब 6 महीने पुरानी है। जो पूरी तरह से सूखी हुई है। पुलिस का कहना है कि खाल को देहरादून स्थित लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच में पता लगेगा कि लेपर्ड की मौत कैसे और किन कारणों से हुई। माण्डवा थानाधिकारी चन्द्रपाल सिंह ने बताया- मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने हिस्ट्रीशीटर सविया पुत्र काला के आमलीघाटी स्थित घर पर 4 मई को 5 बजे दबिश दी थी। दबिश के वक्त घर पर कोई नहीं मिला। घर में तलाशी ली। लेपर्ड की खाल पड़ी मिली। इसे बरामद किया गया। 6 माह पहले हुई थी मौत चन्द्रपाल सिंह ने बताया- वन विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया। जांच में पता लगा कि लेपर्ड की मौत करीब 6 माह पहले हुई थी। खाल के सैम्पल देहरादून स्थित लैब में जांच के लिए भेजे जाएंगे। जांच में पता लगेगा कि लेपर्ड की मौत कैसे और किन कारणों से हुई। आरोपी हिस्ट्रीशीटर पर वन्यजीव संरक्षण का ये पहला मुकदमा है। इससे पहले उस पर मारपीट, आर्म्स एक्ट, झगड़े आदि के एक दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। हिस्ट्रीशीटर की तलाश में जुटी पुलिस आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे कार्रवाई शुरू कर दी है। हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने के लिए टीमें लगा दी हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पता लगेगा कि आखिर ये लेपर्ड की खाल उसके पास कहां से आई। लेपर्ड का शिकार हुआ है या फिर अन्य कारणों से मौत हुई है। इसका पता लगेगा। बता दें कि कोटड़ा और माण्डवा के जंगलों में लेपर्ड का खासा मूवमेंट रहता है। ये भी पढ़ें… लेपर्ड-टाइगर मारकर, खाल और अंगों की दलाली:कीमत 5 से 10 लाख, मूंछ के बाल तक का सौदा, भास्कर के कैमरे में खूंखार शिकारी दैनिक भास्कर ने खतरनाक शिकारियों और वन्यजीवों के अंगों और खाल की तस्करी करने वाले रैकेट को कैमरे पर एक्सपोज किया था। करीब 45 दिन की पड़ताल के बाद टीम शिकारियों की गैंग तक पहुंची थी। (पढ़ें पूरी खबर)
