पाली जिले के रोहट क्षेत्र का बिंजा गांव, जहां पेयजल कनेक्शन तो है लेकिन घरों में पानी नहीं आता। ऐसे में पीने के लिए भी टैंकरों के भरोसे अधिकतर ग्रामीण है। क्योंकि जलदाय विभाग गांव में बने जीएलआर में पानी की सप्लाई देता है जो नाकाफी होती है। ऐसे में अधिकतर ग्रामीण अपने घरों में बने होदों में पानी के टैंकर खाली करवाते हैं। बिजां गांव हाल बैंगलोर निवासी नरपत पटेल ने बताया कि अवालों तक पानी का कनेक्शन नहीं है। ऐस में गौ माता युवा टीम बनाई जो गांव के भामाशाहों के सहयोग से 3 अप्रेल से लगातार गांव में बने पांच अवालों में पानी का टैंकर खाली करवा रही है ताकि बेजुबान पशुओं को गर्मी के इस मौसम में पीने के पानी के लिए भटकना न पड़े। ये टीम रोजाना 800 रुपए के 5 टैंकर मंगवा रही है। ऐसे में, टीम अपने स्तर पर हर साल 1 लाख 20 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। रोज खर्च हो रहे चार हजार रुपए ग्रामीणों ने बताया कि एक पानी के टैंकर के 800 रुपए लगते हैं। रोजाना पांच टैंकर पानी अवालों में खाली किया जाता है। इस हिसाब से रोजाना चार हजार रुपए का पानी अवालों में खाली किया जाता है। इस हिसाब से ग्रामीण पशुओं को पानी पिलाने पर एक महीने में करीब 1 लाख 20 हजार रुपए खर्च कर रहे हैं। इस नेक कार्य में गांव के रामलाल चौधरी, भंवरलाल कोंदली, केवल भाई सिलाना, भीमाराम डांगी, डूंगर सुथार, भरत सैन, नेमाराम मेघवाल, प्रकाश मेघवाल जैसे कई ग्रामीणों का सहयोग है। पीने के लिए भी खरीदना पड़ता है पानी गांव के सोनाराम ने बताया कि पशुओं के लिए भी क्या हमें खुद के पीने के लिए भी पानी खरीदना पड़ता है। गांव में जलदाय विभाग की ओर से पेयजल कनेक्शन तो कर दिए लेकिन पानी नहीं आता। ऐसे में टैंकरों के जरिए पीने और नहाने का पानी खरीदते है। जलदाय विभाग जीएलआर में पानी खाली करता है लेकिन वह पानी पूरे गांव की प्यास नहीं बुझा पाता है। ऐसे में अधिकतर ग्रामीण टैंकरों से पानी की आपूर्ति लेते हैं। क्योंकि सप्ताह में एक-दो बार ही जीएलआर में पानी भरा जाता है। गांव में पानी सप्लाई है मामले में जलदाय विभाग के एक्सईएन कानसिंह राणावत ने कहा कि बींजा गांव में पानी की सप्लाई होती है। घर-घर जो नल कनेक्शन किए गए है। उन्हें पानी आ रहा है या नहीं इसकी जांच करवाएंगे। अवालों में पानी भरने के लिए पीएचईडी निशुल्क पानी उपलब्ध करवाता है।
