ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर गुरुवार (7 मई) को साउथ-वेस्ट कमांड में जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित तीनों सेनाओं के प्रमुख रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसी बीच सीमावर्ती राज्य राजस्थान में एनसीसी की जमीनी स्थिति गंभीर सवाल खड़े कर रही है। 1070 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा वाले राज्य में मिलिट्री बैकअप मानी जाने वाली एनसीसी खुद मैनपावर की कमी से जूझ रही है। वर्तमान में करीब 60 हजार कैडेट्स पर सिर्फ 377 स्टाफ कार्यरत है। 11 हजार नए कैडेट्स जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इसके लिए मांगे गए 92 पदों में से राज्य ने केवल 3 ही मंजूर किए हैं। शुरुआत में 1040 कर्मचारी मांगे थे, तब भी सिर्फ 644 ही दिए थे एनसीसी निदेशालय की स्थापना के समय केंद्र ने राज्य से 1040 कर्मचारी मांगे थे, लेकिन तब भी 644 ही दिए थे। ऐसे में पहले से ही बड़ी संख्या में पद खाली हैं। कई यूनिट्स कम स्टाफ में संचालित हो रही हैं, जहां पीआई स्टाफ को चतुर्थ श्रेणी के कार्य तक करने पड़ रहे हैं। इससे प्रशिक्षण और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। देशभर में 20 लाख कैडेट्स का लक्ष्य तय किया गया है और सीमावर्ती व तटीय 173 जिलों में विस्तार हो रहा है। ऐसे में मैनपावर की कमी जारी रहने पर राजस्थान को भविष्य में कैडेट्स की नई सीटें मिलने में दिक्कत हो सकती है। कई यूनिट्स में वाहन तो खड़े हैं, लेकिन ड्राइवर नहीं होने से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा। “सरकार को प्रस्ताव भेज देते हैं, निर्णय वित्त विभाग लेता है। करीब 50% पद खाली हैं। कई पद पुराने ढांचे के हैं, जिन्हें जस्टिफाई करना मुश्किल है। 8 मई को एनसीसी महानिदेशक उपमुख्यमंत्री से मिलेंगे।”
-डॉ. नरेंद्र गुप्ता, स्टेट लाइजन ऑफिसर “राज्य को समस्या की जानकारी है। इसके लिए प्रपोजल भेजा गया है, जो विचाराधीन है।”
-एयर कोमोडोर एस.के. आनंद, डीडीजी, राजस्थान
