प्रदेश की पशुधन निशुल्क आरोग्य योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है, जहां इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। भरतपुर जिला औषधि भंडार में बीमार बेजुबानों के घाव भरने और ऑपरेशन के बाद संक्रमण रोकने के लिए जो पॉविडिन आयोडीन दवा खरीदी गई, उसकी बोतलों में दवा के स्थान पर गंदा पानी भरा मिला। यह मामला केवल एक घटिया सप्लाई का नहीं है, बल्कि उन हजारों मूक पशुओं की जान से खिलवाड़ है जिनके गहरे जख्मों पर डॉक्टर दवा समझकर महीनों से दूषित पानी छिड़क रहे थे। जांच कमेटी ने औषधि भंडार का औचक निरीक्षण किया । इस दौरान फर्म विनायक मेन्यूट्रेड द्वारा आपूर्ति की गई दवा के कई कार्टन रैंडमली चेक किए गए। जांच में खुलासा हुआ कि बोतलों में किसी भी प्रकार का पॉविडिन आयोडीन लिक्विड जैसा न तो रंग है, न ही वैसी खुशबू और न ही विस्कोसिटी है। कमेटी ने भौतिक रूप से यह सत्यापित किया कि इन बोतलों के अंदर पाया गया लिक्विड पूरी तरह से पारदर्शी और गंदे पानी जैसा है। कमेटी ने खुली और सीलबंद बोतलों को तुरंत जब्त कर लिया। इसके बाद फर्म को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा भी कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि इस फर्जी दवा की सप्लाई का बिल भंडार पंजिका में दर्ज होने के बाद 10 फरवरी 2026 को ही भुगतान के लिए निदेशालय जयपुर भेजा जा चुका था। लापरवाही… दवा का बिल भंडार पंजिका में दर्ज कर निदेशालय को भेजा भ्रष्टाचार का अंकगणित… निदेशालय पशुपालन विभाग जयपुर के आदेश पर फर्म ने 3 अक्टूबर 2025 को कुल 2530 बोतलें सप्लाई की थीं। विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि जाँच होने से पहले ही इस दूषित बैच की 2330 बोतलें जिले की विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थाओं को वितरित कर दी गईं। भंडार में इस बैच की केवल 200 बोतलें ही बची हैं, जबकि हजारों बोतलें बेजुबानों को लगाई जा चुकी थी। जांच कमेटी की रिपोर्ट… जांच कमेटी में शामिल संयुक्त निदेशक डॉ. रामकिशन महावर, उप निदेशक मनीष शर्मा, सह प्रभारी संदीप और भंडार पाल पवन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि बोतलों के भीतर पाया गया तरल पदार्थ पूरी तरह पारदर्शी और गंदे पानी जैसा है। इसमें पॉविडिन आयोडीन जैसा न तो कोई रंग है और न ही इसकी विशिष्ट खुशबू। कमेटी ने इसे पशु स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ मानते हुए फर्म विनायक मेन्यूट्रेड को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने और उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की है। दवा के उपयोग पर लगाई रोक … मामला उजागर होने के बाद संयुक्त निदेशक डॉ. रामकिशन महावर ने भरतपुर और डीग जिले के समस्त नोडल अधिकारियों को इस दवा के उपयोग पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सहायक औषधि नियंत्रण अधिकारी को पत्र लिखकर दवा के सैंपल की लैब में गुणवत्ता जाँच करवाने को कहा गया है ताकि सप्लायर के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी कार्यवाही की जा सके।
