जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा पिछले 21 महीनों से ठप पड़ी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही और टेंडर प्रक्रिया की कानूनी उलझनों के कारण गरीब मरीज निजी सेंटरों पर लूटने को मजबूर हैं। रोजाना 40-50 मरीज जांच के लिए बाहर जा रहे हैं, इससे जनता को प्रतिदिन 2.5 से 3 लाख रुपए की आर्थिक चपत लग रही है।
बुधवार को अस्पताल की 5 सदस्यीय उपापन कमेटी ने कड़ा रुख अपनाया है। मैसर्स मंगलम हॉस्पिटल, धोरीमन्ना को अंतिम नोटिस जारी कर 5 दिन का अल्टीमेटम दिया है। फिर 6 लाख जुर्माना वसूलेंगे। मरीजों का दर्द: 10 हजार जेब में हों तभी आएं अस्पताल अस्पताल में भर्ती वेंटिलेटर वाले गंभीर मरीजों को भी निजी एम्बुलेंस के 3 हजार रुपए देकर बाहर ले जाना पड़ रहा है। निजी सेंटर एक जांच के 5 से 7 हजार रुपए वसूल रहे हैं। सुविधा न होने से रोजाना 10-15 घायल मरीजों को जोधपुर रेफर करना पड़ रहा है। एक ही सर्जरी वार्ड के 5 मरीजों को 25 हजार की चपत सर्जरी वार्ड में बेड नंबर 6 पर भर्ती तेजकरण ने अपेंडिक्स की जांच बाहर से करवाई तो 4500 रुपए का खर्चा आया। इसी तरह बेड 1 के कबीराराम के एक्सीडेंट केस में 6500 रुपए, बेड 12 के मुकेश के जांच के नाम पर 5500 रुपए, बेड 23 के चंदाराम के 6 हजार रुपए और बेड 25 पर भर्ती उम्मेदाराम जो घायल है, उनके 2500 रुपए खर्च हुए है। सभी जिला अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद जांचों की सुविधा नहीं होने की वजह से बाहर से जांचें करवाने में रुपए देने पड़ रहे हैं। तारीखों में उलझा टेंडर 20 जनवरी 2026: मंगलम हॉस्पिटल को वर्क ऑर्डर मिला।
14 फरवरी: दूसरे नंबर की फर्म की अपील के कारण काम रुका।
12 मार्च: राजमेस ने अपील खारिज कर मंगलम को 10 दिन का समय।
8 अप्रैल: फर्म को फिर 3 दिन की मोहलत मिली, पर काम नहीं हुआ।
5 मई: बाड़मेर सीटी एंड इमेजिंग की अपील भी खारिज हुई। “उपापन कमेटी ने मंगलम हॉस्पिटल को 5 दिन का समय दिया है। मशीन न लगने पर सिक्योरिटी जब्त कर अगली फर्म को काम सौंपा जाएगा।” – डॉ. हनुमानराम चौधरी, अधीक्षक, जिला अस्पताल
